अन्वेषण › विषय › जहाज और जलयात्रा
आश्चर्यजनक बातें
बाइबल में जहाज और जलयात्रा
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी के 31 अंश, पंक्ति-दर-पंक्ति, Nave’s Topical Bible से।
- नूह का जहाज: गोपेर की लकड़ी, कोठरियाँ, भीतर-बाहर रालउत्प 6:14–15
पद
उत्प 6:14–15इसलिए तू गोपेर वृक्ष की लकड़ी का एक जहाज बना ले, उसमें कोठरियाँ बनाना, और भीतर-बाहर उस पर राल लगाना। इस ढंग से तू उसको बनाना: जहाज की लम्बाई तीन सौ हाथ, चौड़ाई पचास हाथ, और ऊँचाई तीस हाथ की हो।
- सुलैमान ने लाल समुद्र के किनारे एस्योनगेबेर में जहाज बनाए1 राजा 9:26
पद
1 राजा 9:26फिर राजा सुलैमान ने एस्योनगेबेर में जो एदोम देश में लाल समुद्र के किनारे एलोत के पास है, जहाज बनाए।
- हीराम के जहाजी ओपीर से 450 किक्कार सोना लाए2 इति 8:18
पद
2 इति 8:18हीराम ने उसके पास अपने जहाजियों के द्वारा जहाज और समुद्र के जानकार मल्लाह भेज दिए, और उन्होंने सुलैमान के जहाजियों के संग ओपीर को जाकर वहाँ से साढ़े चार सौ किक्कार सोना राजा सुलैमान को ला दिया।
- हर तीन वर्ष: सोना, चाँदी, हाथी दाँत, बन्दर और मयूर1 राजा 10:22
पद
1 राजा 10:22क्योंकि समुद्र पर हीराम के जहाजों के साथ राजा भी तर्शीश के जहाज रखता था, और तीन-तीन वर्ष पर तर्शीश के जहाज सोना, चाँदी, हाथी दाँत, बन्दर और मयूर ले आते थे।
- यहोशापात के जहाज चलने से पहले ही टूट गए1 राजा 22:48, 2 इति 20:36–37
पद
1 राजा 22:48फिर यहोशापात ने तर्शीश के जहाज सोना लाने के लिये ओपीर जाने को बनवा लिए, परन्तु वे एस्योनगेबेर में टूट गए, इसलिए वहाँ न जा सके।
2 इति 20:36–37अर्थात् उसने उसके साथ इसलिए मेल किया कि तर्शीश जाने को जहाज बनवाए, और उन्होंने ऐसे जहाज एस्योनगेबेर में बनवाए। तब दोदावाह के पुत्र मारेशावासी एलीएजेर ने यहोशापात के विरुद्ध यह नबूवत की, “तूने जो अहज्याह से मेल किया, इस कारण यहोवा तेरी बनवाई हुई वस्तुओं को तोड़ डालेगा।” अतः जहाज टूट गए और तर्शीश को न जा सके।
- यहेजकेल सोर को सनोवर, देवदार, बांज और सनी के जहाज के रूप में दिखाता हैयहे 27:5–7
पद
यहे 27:5–7तेरी सब पटरियाँ सनीर पर्वत के सनोवर की लकड़ी की बनी हैं; तेरे मस्तूल के लिये लबानोन के देवदार लिए गए हैं। तेरे डाँड़ बाशान के बांजवृक्षों के बने; तेरे जहाजों का पटाव कित्तियों के द्वीपों से लाए हुए सीधे सनोवर की हाथी दाँत जड़ी हुई लकड़ी का बना। तेरे जहाजों के पाल मिस्र से लाए हुए बूटेदार सन के कपड़े के बने कि तेरे लिये झण्डे का काम दें; तेरी चाँदनी एलीशा के द्वीपों से लाए हुए नीले और बैंगनी रंग के कपड़ों की बनी।
- सरकण्डों की नावों में दूत जल के मार्ग से जाते थेयशा 18:2
पद
यशा 18:2और समुद्र पर दूतों को सरकण्डों की नावों में बैठाकर जल के मार्ग से यह कह के भेजता है, हे फुर्तीले दूतों, उस जाति के पास जाओ जिसके लोग बलिष्ठ और सुन्दर हैं, जो आदि से अब तक डरावने हैं, जो मापने और रौंदनेवाला भी हैं, और जिनका देश नदियों से विभाजित किया हुआ है।
- बड़ा जहाज एक छोटी सी पतवार से घुमाया जाता हैयाकू 3:4
पद
याकू 3:4देखो, जहाज भी, यद्यपि ऐसे बड़े होते हैं, और प्रचण्ड वायु से चलाए जाते हैं, तो भी एक छोटी सी पतवार के द्वारा माँझी की इच्छा के अनुसार घुमाए जाते हैं।
- समुद्र में जहाज की चाल: आगूर की समझ से परेनीति 30:18–19
पद
नीति 30:18–19तीन बातें मेरे लिये अधिक कठिन है, वरन् चार हैं, जो मेरी समझ से परे हैं आकाश में उकाब पक्षी का मार्ग, चट्टान पर सर्प की चाल, समुद्र में जहाज की चाल, और कन्या के संग पुरुष की चाल।
यात्राएँ
- योना ने तर्शीश जानेवाले जहाज का भाड़ा दियायोना 1:3
पद
योना 1:3परन्तु योना यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को भाग जाने के लिये उठा, और याफा नगर को जाकर तर्शीश जानेवाला एक जहाज पाया; और भाड़ा देकर उस पर चढ़ गया कि उनके साथ होकर यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को चला जाए।
- आँधी में मल्लाहों ने जहाज का माल समुद्र में फेंक दियायोना 1:4–5
पद
योना 1:4–5तब यहोवा ने समुद्र में एक प्रचण्ड आँधी चलाई, और समुद्र में बड़ी आँधी उठी, यहाँ तक कि जहाज टूटने पर था। तब मल्लाह लोग डरकर अपने-अपने देवता की दुहाई देने लगे; और जहाज में जो व्यापार की सामग्री थी उसे समुद्र में फेंकने लगे कि जहाज हलका हो जाए। परन्तु योना जहाज के निचले भाग में उतरकर वहाँ लेटकर सो गया, और गहरी नींद में पड़ा हुआ था।
- उन्होंने बड़े यत्न से खेया, पर किनारे तक न पहुँच सकेयोना 1:13
पद
योना 1:13तो भी वे बड़े यत्न से खेते रहे कि उसको किनारे पर लगाएँ, परन्तु पहुँच न सके, क्योंकि समुद्र की लहरें उनके विरुद्ध बढ़ती ही जाती थीं।
- यीशु ने शमौन की नाव पर से लोगों को उपदेश दियालूका 5:2–3
पद
लूका 5:2–3कि उसने झील के किनारे दो नावें लगी हुई देखीं, और मछुए उन पर से उतरकर जाल धो रहे थे। उन नावों में से एक पर, जो शमौन की थी, चढ़कर, उसने उससे विनती की, कि किनारे से थोड़ा हटा ले चले, तब वह बैठकर लोगों को नाव पर से उपदेश देने लगा।
- आँधी में यीशु नाव के पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा थामर 4:37–38
पद
मर 4:37–38तब बड़ी आँधी आई, और लहरें नाव पर यहाँ तक लगीं, कि वह अब पानी से भरी जाती थी। और वह आप पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा था; तब उन्होंने उसे जगाकर उससे कहा, “हे गुरु, क्या तुझे चिन्ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं?”
- चेले हवा के विरुद्ध खेते-खेते घबरा गएमर 6:48
पद
मर 6:48और जब उसने देखा, कि वे खेते-खेते घबरा गए हैं, क्योंकि हवा उनके विरुद्ध थी, तो रात के चौथे पहर के निकट वह झील पर चलते हुए उनके पास आया; और उनसे आगे निकल जाना चाहता था।
- पौलुस के तीन बार जहाज टूटे और उसने एक रात-दिन समुद्र में काटा2 कुरि 11:25
पद
2 कुरि 11:25तीन बार मैंने बेंतें खाई; एक बार पथराव किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक रात दिन मैंने समुद्र में काटा।
पौलुस की रोम यात्रा
- आसिया के किनारे जानेवाला अद्रमुत्तियुम का जहाजप्रेरि 27:2
पद
प्रेरि 27:2अद्रमुत्तियुम के एक जहाज पर जो आसिया के किनारे की जगहों में जाने पर था, चढ़कर हमने उसे खोल दिया, और अरिस्तर्खुस नामक थिस्सलुनीके का एक मकिदुनी हमारे साथ था।
- उपवास के दिनों के बाद जलयात्रा जोखिम भरी थीप्रेरि 27:9
पद
प्रेरि 27:9जब बहुत दिन बीत गए, और जलयात्रा में जोखिम इसलिए होती थी कि उपवास के दिन अब बीत चुके थे, तो पौलुस ने उन्हें यह कहकर चेतावनी दी,
- यूरकुलीन आँधी आई; उन्होंने जहाज के नीचे रस्से बाँधेप्रेरि 27:14, प्रेरि 27:17
पद
प्रेरि 27:14परन्तु थोड़ी देर में जमीन की ओर से एक बड़ी आँधी उठी, जो ‘यूरकुलीन’ कहलाती है।
प्रेरि 27:17फिर मल्लाहों ने उसे उठाकर, अनेक उपाय करके जहाज को नीचे से बाँधा, और सुरतिस के रेत पर टिक जाने के भय से पाल और सामान उतार कर बहते हुए चले गए।
- पहले माल, फिर जहाज का साज-सामान फेंक दिया गयाप्रेरि 27:18–19
पद
प्रेरि 27:18–19और जब हमने आँधी से बहुत हिचकोले और धक्के खाए, तो दूसरे दिन वे जहाज का माल फेंकने लगे; और तीसरे दिन उन्होंने अपने हाथों से जहाज का साज-सामान भी फेंक दिया।
- थाह ली गई: पानी उथला होता जा रहा थाप्रेरि 27:28
पद
प्रेरि 27:28थाह लेकर उन्होंने बीस पुरसा गहरा पाया और थोड़ा आगे बढ़कर फिर थाह ली, तो पन्द्रह पुरसा पाया।
- जहाज के पीछे चार लंगर डाले गएप्रेरि 27:29
पद
प्रेरि 27:29तब पत्थरीली जगहों पर पड़ने के डर से उन्होंने जहाज के पीछे चार लंगर डाले, और भोर होने की कामना करते रहे।
- मल्लाहों ने डोंगी में भागना चाहा; सिपाहियों ने उसकी रस्सियाँ काट दींप्रेरि 27:30, प्रेरि 27:32
पद
प्रेरि 27:30परन्तु जब मल्लाह जहाज पर से भागना चाहते थे, और गलही से लंगर डालने के बहाने डोंगी समुद्र में उतार दी;
प्रेरि 27:32तब सिपाहियों ने रस्से काटकर डोंगी गिरा दी।
- जहाज पर 276 जन थेप्रेरि 27:37
पद
प्रेरि 27:37हम सब मिलकर जहाज पर दो सौ छिहत्तर जन थे।
- जहाज हलका करने के लिये उन्होंने गेहूँ समुद्र में फेंक दियाप्रेरि 27:38
पद
प्रेरि 27:38जब वे भोजन करके तृप्त हुए, तो गेहूँ को समुद्र में फेंककर जहाज हलका करने लगे।
- जहाज टिक गया और उसका पिछला भाग टूटने लगाप्रेरि 27:41
पद
प्रेरि 27:41परन्तु दो समुद्र के संगम की जगह पड़कर उन्होंने जहाज को टिकाया, और गलही तो धक्का खाकर गड़ गई, और टल न सकी; परन्तु जहाज का पीछला भाग लहरों के बल से टूटने लगा।
- सब भूमि पर बच निकले, कुछ पटरों के सहारेप्रेरि 27:44
पद
प्रेरि 27:44और बाकी कोई पटरों पर, और कोई जहाज की अन्य वस्तुओं के सहारे निकल जाएँ, इस रीति से सब कोई भूमि पर बच निकले।
- सिकन्दरिया के जहाज दियुसकूरी पर रोम की ओरप्रेरि 28:11
पद
प्रेरि 28:11तीन महीने के बाद हम सिकन्दरिया के एक जहाज पर चल निकले, जो उस टापू में जाड़े काट रहा था, और जिसका चिन्ह दियुसकूरी था।
स्रोत
Nave’s Topical Bible (Orville J. Nave, 1896; सार्वजनिक क्षेत्र) से: विषय चुने गए, पंक्तियाँ संक्षिप्त करके आधुनिक शब्दों में रखी गईं, व्याख्या की पंक्तियाँ छोड़ दी गईं; हर पद जाँचा गया।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी · © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions, CC BY-SA 4.0; changed: footnotes, headings, the cross references printed in the verses, the speakers' labels in the Song of Songs and the letters over Psalm 119 left out.