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आश्चर्यजनक बातें

बाइबल में लम्बी आयु

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी के 37 अंश, पंक्ति-दर-पंक्ति, Nave’s Topical Bible से।

  • जल-प्रलय से पहले यहोवा मनुष्य की आयु की सीमा ठहराता हैउत्प 6:3
    पद
    उत्प 6:3तब यहोवा ने कहा, “मेरा आत्मा मनुष्य में सदा के लिए निवास न करेगा, क्योंकि मनुष्य भी शरीर ही है; उसकी आयु एक सौ बीस वर्ष की होगी।”
  • एक भजन: हमारी आयु सत्तर वर्ष, या बल हो तो अस्सीभज 90:10
    पद
    भज 90:10हमारी आयु के वर्ष सत्तर तो होते हैं, और चाहे बल के कारण अस्सी वर्ष भी हो जाएँ, तो भी उनका घमण्ड केवल कष्ट और शोक ही शोक है; क्योंकि वह जल्दी कट जाती है, और हम जाते रहते हैं।

जल-प्रलय से पहले

  • आदम 930 वर्ष जीवित रहाउत्प 5:5
    पद
    उत्प 5:5इस प्रकार आदम की कुल आयु नौ सौ तीस वर्ष की हुई, तत्पश्चात् वह मर गया।
  • शेत 912 वर्ष जीवित रहाउत्प 5:8
    पद
    उत्प 5:8इस प्रकार शेत की कुल आयु नौ सौ बारह वर्ष की हुई; तत्पश्चात् वह मर गया।
  • एनोश 905 वर्ष जीवित रहाउत्प 5:11
    पद
    उत्प 5:11इस प्रकार एनोश की कुल आयु नौ सौ पाँच वर्ष की हुई; तत्पश्चात् वह मर गया।
  • केनान 910 वर्ष जीवित रहाउत्प 5:14
    पद
    उत्प 5:14इस प्रकार केनान की कुल आयु नौ सौ दस वर्ष की हुई; तत्पश्चात् वह मर गया।
  • महललेल 895 वर्ष जीवित रहाउत्प 5:17
    पद
    उत्प 5:17इस प्रकार महललेल की कुल आयु आठ सौ पंचानबे वर्ष की हुई; तत्पश्चात् वह मर गया।
  • येरेद 962 वर्ष जीवित रहाउत्प 5:20
    पद
    उत्प 5:20इस प्रकार येरेद की कुल आयु नौ सौ बासठ वर्ष की हुई; तत्पश्चात् वह मर गया।
  • हनोक: 365 वर्ष, फिर वह लोप हो गयाउत्प 5:23–24
    पद
    उत्प 5:23–24इस प्रकार हनोक की कुल आयु तीन सौ पैंसठ वर्ष की हुई। हनोक परमेश्वर के साथ-साथ चलता था; फिर वह लोप हो गया क्योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया।
  • मतूशेलह 969 वर्ष जीवित रहाउत्प 5:27
    पद
    उत्प 5:27इस प्रकार मतूशेलह की कुल आयु नौ सौ उनहत्तर वर्ष की हुई; तत्पश्चात् वह मर गया।
  • लेमेक 777 वर्ष जीवित रहाउत्प 5:31
    पद
    उत्प 5:31इस प्रकार लेमेक की कुल आयु सात सौ सतहत्तर वर्ष की हुई; तत्पश्चात् वह मर गया।
  • नूह जल-प्रलय के बाद 350 वर्ष जीवित रहा, कुल 950 वर्षउत्प 9:28–29
    पद
    उत्प 9:28–29जल-प्रलय के पश्चात् नूह साढ़े तीन सौ वर्ष जीवित रहा। इस प्रकार नूह की कुल आयु साढ़े नौ सौ वर्ष की हुई; तत्पश्चात् वह मर गया।

जल-प्रलय के बाद

  • शेम: 100 वर्ष में पुत्र, फिर 500 वर्ष औरउत्प 11:10–11
    पद
    उत्प 11:10–11शेम की वंशावली यह है। जल-प्रलय के दो वर्ष पश्चात् जब शेम एक सौ वर्ष का हुआ, तब उसने अर्पक्षद को जन्म दिया। और अर्पक्षद के जन्म के पश्चात् शेम पाँच सौ वर्ष जीवित रहा; और उसके और भी बेटे-बेटियाँ उत्पन्न हुईं।
  • अर्पक्षद: 35 वर्ष में पुत्र, फिर 403 वर्ष औरउत्प 11:12–13
    पद
    उत्प 11:12–13जब अर्पक्षद पैंतीस वर्ष का हुआ, तब उसने शेलह को जन्म दिया। और शेलह के जन्म के पश्चात् अर्पक्षद चार सौ तीन वर्ष और जीवित रहा, और उसके और भी बेटे-बेटियाँ उत्पन्न हुईं।
  • शेलह: 30 वर्ष में पुत्र, फिर 403 वर्ष औरउत्प 11:14–15
    पद
    उत्प 11:14–15जब शेलह तीस वर्ष का हुआ, तब उसके द्वारा एबेर का जन्म हुआ। और एबेर के जन्म के पश्चात् शेलह चार सौ तीन वर्ष और जीवित रहा, और उसके और भी बेटे-बेटियाँ उत्पन्न हुईं।
  • एबेर: 34 वर्ष में पुत्र, फिर 430 वर्ष औरउत्प 11:16–17
    पद
    उत्प 11:16–17जब एबेर चौंतीस वर्ष का हुआ, तब उसके द्वारा पेलेग का जन्म हुआ। और पेलेग के जन्म के पश्चात् एबेर चार सौ तीस वर्ष और जीवित रहा, और उसके और भी बेटे-बेटियाँ उत्पन्न हुईं।
  • पेलेग: 30 वर्ष में पुत्र, फिर 209 वर्ष औरउत्प 11:18–19
    पद
    उत्प 11:18–19जब पेलेग तीस वर्ष का हुआ, तब उसके द्वारा रू का जन्म हुआ। और रू के जन्म के पश्चात् पेलेग दो सौ नौ वर्ष और जीवित रहा, और उसके और भी बेटे-बेटियाँ उत्पन्न हुईं।
  • नाहोर: 29 वर्ष में पुत्र, फिर 119 वर्ष औरउत्प 11:24–25
    पद
    उत्प 11:24–25जब नाहोर उनतीस वर्ष का हुआ, तब उसके द्वारा तेरह का जन्म हुआ; और तेरह के जन्म के पश्चात् नाहोर एक सौ उन्नीस वर्ष और जीवित रहा, और उसके और भी बेटे-बेटियाँ उत्पन्न हुईं।
  • तेरह 205 वर्ष जीवित रहा और हारान में मराउत्प 11:32
    पद
    उत्प 11:32जब तेरह दो सौ पाँच वर्ष का हुआ, तब वह हारान देश में मर गया।

बाद के जीवन

  • सारा 127 वर्ष की आयु तक जीवित रहीउत्प 23:1
    पद
    उत्प 23:1सारा तो एक सौ सताईस वर्ष की आयु को पहुँची; और जब सारा की इतनी आयु हुई;
  • अब्राहम 175 वर्ष जीवित रहाउत्प 25:7
    पद
    उत्प 25:7अब्राहम की सारी आयु एक सौ पचहत्तर वर्ष की हुई।
  • इश्माएल ने भी लम्बी आयु पाईउत्प 25:17
    पद
    उत्प 25:17इश्माएल की सारी आयु एक सौ सैंतीस वर्ष की हुई; तब उसके प्राण छूट गए, और वह अपने लोगों में जा मिला।
  • इसहाक 180 वर्ष जीवित रहाउत्प 35:28
    पद
    उत्प 35:28इसहाक की आयु एक सौ अस्सी वर्ष की हुई।
  • याकूब 147 वर्ष जीवित रहा, अन्तिम सत्रह वर्ष मिस्र मेंउत्प 47:28
    पद
    उत्प 47:28मिस्र देश में याकूब सत्रह वर्ष जीवित रहा इस प्रकार याकूब की सारी आयु एक सौ सैंतालीस वर्ष की हुई।
  • यूसुफ 110 वर्ष का होकर मरा और मिस्र में उसके शव में सुगन्ध-द्रव्य भरे गएउत्प 50:26
    पद
    उत्प 50:26इस प्रकार यूसुफ एक सौ दस वर्ष का होकर मर गया: और उसके शव में सुगन्ध-द्रव्य भरे गए, और वह शव मिस्र में एक शवपेटी में रखा गया।
  • लेवी 137 वर्ष, कहात 133 और अम्राम 137 वर्ष जीवित रहेनिर्ग 6:16, निर्ग 6:18, निर्ग 6:20
    पद
    निर्ग 6:16लेवी के पुत्र जिनसे उनकी वंशावली चली है, उनके नाम ये हैं: अर्थात् गेर्शोन, कहात और मरारी, और लेवी की पूरी अवस्था एक सौ सैंतीस वर्ष की हुई।
    निर्ग 6:18कहात के पुत्र: अम्राम, यिसहार, हेब्रोन और उज्जीएल थे, और कहात की पूरी अवस्था एक सौ सैंतीस वर्ष की हुई।
    निर्ग 6:20अम्राम ने अपनी फूफी योकेबेद को ब्याह लिया और उससे हारून और मूसा उत्पन्न हुए, और अम्राम की पूरी अवस्था एक सौ सैंतीस वर्ष की हुई।
  • हारून 123 वर्ष की आयु में होर पर्वत पर मरागिन 33:39
    पद
    गिन 33:39और जब हारून होर पर्वत पर मर गया तब वह एक सौ तेईस वर्ष का था।
  • मूसा 120 वर्ष की आयु में मरा, उसकी आँखें धुँधली नहीं पड़ी थींव्यव 34:7
    पद
    व्यव 34:7मूसा अपनी मृत्यु के समय एक सौ बीस वर्ष का था; परन्तु न तो उसकी आँखें धुँधली पड़ीं, और न उसका पौरूष घटा था।
  • 85 वर्ष का कालेब: अब भी उतना ही बलवन्त जितना मूसा के भेजने के दिन थायहो 14:10–11
    पद
    यहो 14:10–11और अब देख, जब से यहोवा ने मूसा से यह वचन कहा था तब से पैंतालीस वर्ष हो चुके हैं, जिनमें इस्राएली जंगल में घूमते फिरते रहे; उनमें यहोवा ने अपने कहने के अनुसार मुझे जीवित रखा है; और अब मैं पचासी वर्ष का हूँ। जितना बल मूसा के भेजने के दिन मुझ में था उतना बल अभी तक मुझ में है; युद्ध करने और भीतर बाहर आने-जाने के लिये जितनी उस समय मुझ में सामर्थ्य थी उतनी ही अब भी मुझ में सामर्थ्य है।
  • यहोशू 110 वर्ष का होकर मरायहो 24:29
    पद
    यहो 24:29इन बातों के बाद यहोवा का दास, नून का पुत्र यहोशू, एक सौ दस वर्ष का होकर मर गया।
  • एली 98 वर्ष का था और उसे कुछ सूझता न था1 शमू 4:15
    पद
    1 शमू 4:15एली तो अठानवे वर्ष का था, और उसकी आँखें धुंधली पड़ गई थीं, और उसे कुछ सूझता न था।
  • अस्सी वर्ष के बर्जिल्लै ने राजा दाऊद का पालन-पोषण किया था2 शमू 19:32
    पद
    2 शमू 19:32बर्जिल्लै तो वृद्ध पुरुष था, अर्थात् अस्सी वर्ष की आयु का था जब तक राजा महनैम में रहता था तब तक वह उसका पालन-पोषण करता रहा; क्योंकि वह बहुत धनी था।
  • यहोयादा याजक 130 वर्ष की आयु में मरा2 इति 24:15
    पद
    2 इति 24:15परन्तु यहोयादा बूढ़ा हो गया और दीर्घायु होकर मर गया। जब वह मर गया तब एक सौ तीस वर्ष का था।
  • अय्यूब 140 वर्ष और जीवित रहा और चार पीढ़ियाँ देखींअय्यू 42:16–17
    पद
    अय्यू 42:16–17इसके बाद अय्यूब एक सौ चालीस वर्ष जीवित रहा, और चार पीढ़ी तक अपना वंश देखने पाया। अन्त में अय्यूब वृद्धावस्था में दीर्घायु होकर मर गया।
  • हन्नाह, चौरासी वर्ष की विधवा, मन्दिर को नहीं छोड़ती थीलूका 2:36–37
    पद
    लूका 2:36–37और आशेर के गोत्र में से हन्नाह नामक फनूएल की बेटी एक भविष्यद्वक्तिन थी: वह बहुत बूढ़ी थी, और विवाह होने के बाद सात वर्ष अपने पति के साथ रह पाई थी। वह चौरासी वर्ष की विधवा थी: और मन्दिर को नहीं छोड़ती थी पर उपवास और प्रार्थना कर करके रात-दिन उपासना किया करती थी।

स्रोत

Nave’s Topical Bible (Orville J. Nave, 1896; सार्वजनिक क्षेत्र) से: विषय चुने गए, पंक्तियाँ संक्षिप्त करके आधुनिक शब्दों में रखी गईं, व्याख्या की पंक्तियाँ छोड़ दी गईं; हर पद जाँचा गया।

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी · © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions, CC BY-SA 4.0; changed: footnotes, headings, the cross references printed in the verses, the speakers' labels in the Song of Songs and the letters over Psalm 119 left out.