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आश्चर्यजनक बातें

बाइबल में मधु

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी के 22 अंश, पंक्ति-दर-पंक्ति, Nave’s Topical Bible से।

  • ऐसा देश जिसमें दूध और मधु की धारा बहती हैनिर्ग 3:8, लैव्य 20:24
    पद
    निर्ग 3:8इसलिए अब मैं उतर आया हूँ कि उन्हें मिस्रियों के वश से छुड़ाऊँ, और उस देश से निकालकर एक अच्छे और बड़े देश में जिसमें दूध और मधु की धारा बहती है, अर्थात् कनानी, हित्ती, एमोरी, परिज्जी, हिब्बी, और यबूसी लोगों के स्थान में पहुँचाऊँ।
    लैव्य 20:24पर मैं तुम लोगों से कहता हूँ कि तुम तो उनकी भूमि के अधिकारी होंगे, और मैं इस देश को जिसमें दूध और मधु की धाराएँ बहती हैं तुम्हारे अधिकार में कर दूँगा; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ जिसने तुम को अन्य देशों के लोगों से अलग किया है।
  • तेलवाले जैतून और मधु का देशव्यव 8:8
    पद
    व्यव 8:8फिर वह गेहूँ, जौ, दाखलताओं, अंजीरों, और अनारों का देश है; और तेलवाले जैतून और मधु का भी देश है।
  • मन्ना का स्वाद मधु के बने पूए का सा थानिर्ग 16:31
    पद
    निर्ग 16:31इस्राएल के घराने ने उस वस्तु का नाम मन्ना रखा; और वह धनिया के समान श्वेत था, और उसका स्वाद मधु के बने हुए पूए का सा था।
  • यहोवा के लिये हवन में मधु न जलाया जाएलैव्य 2:11
    पद
    लैव्य 2:11“कोई अन्नबलि जिसे तुम यहोवा के लिये चढ़ाओ ख़मीर मिलाकर बनाया न जाए; तुम कभी हवन में यहोवा के लिये ख़मीर और मधु न जलाना।
  • चट्टान में से मधुव्यव 32:13, भज 81:16
    पद
    व्यव 32:13उसने उसको पृथ्वी के ऊँचे-ऊँचे स्थानों पर सवार कराया, और उसको खेतों की उपज खिलाई; उसने उसे चट्टान में से मधु और चकमक की चट्टान में से तेल चुसाया।
    भज 81:16मैं उनको उत्तम से उत्तम गेहूँ खिलाता, और मैं चट्टान के मधु से उनको तृप्त करता।”

कहानियों में

  • याकूब ने मिस्र में भेंट के लिये थोड़ा सा मधु भेजाउत्प 43:11
    पद
    उत्प 43:11तब उनके पिता इस्राएल ने उनसे कहा, “यदि सचमुच ऐसी ही बात है, तो यह करो; इस देश की उत्तम-उत्तम वस्तुओं में से कुछ कुछ अपने बोरों में उस पुरुष के लिये भेंट ले जाओ: जैसे थोड़ा सा बलसान, और थोड़ा सा मधु, और कुछ सुगन्ध-द्रव्य, और गन्धरस, पिस्ते, और बादाम।
  • शिमशोन ने सिंह की लोथ में से मधु खायान्याय 14:8–9
    पद
    न्याय 14:8–9कुछ दिनों के बीतने पर वह उसे लाने को लौट चला; और उस सिंह की लोथ देखने के लिये मार्ग से मुड़ गया, तो क्या देखा कि सिंह की लोथ में मधुमक्खियों का एक झुण्ड और मधु भी है। तब वह उसमें से कुछ हाथ में लेकर खाते-खाते अपने माता पिता के पास गया, और उनको यह बिना बताए, कि मैंने इसको सिंह की लोथ में से निकाला है, कुछ दिया, और उन्होंने भी उसे खाया।
  • शाऊल की शपथ के विरुद्ध योनातान ने वन में मधु चखा1 शमू 14:25–27, 1 शमू 14:43
    पद
    1 शमू 14:25–27और सब लोग किसी वन में पहुँचे, जहाँ भूमि पर मधु पड़ा हुआ था। जब लोग वन में आए तब क्या देखा, कि मधु टपक रहा है, तो भी शपथ के डर के मारे कोई अपना हाथ अपने मुँह तक न ले गया। परन्तु योनातान ने अपने पिता को लोगों को शपथ धराते न सुना था, इसलिए उसने अपने हाथ की छड़ी की नोक बढ़ाकर मधु के छत्ते में डुबाया, और अपना हाथ अपने मुँह तक ले गया; तब उसकी आँखों में ज्योति आई।
    1 शमू 14:43तब शाऊल ने योनातान से कहा, “मुझे बता, कि तूने क्या किया है।” योनातान ने बताया, और उससे कहा, “मैंने अपने हाथ की छड़ी की नोक से थोड़ा सा मधु चख तो लिया था; और देख, मुझे मरना है।”
  • थोड़ा सा मधु चखने पर उसकी आँखें चमक उठीं1 शमू 14:29
    पद
    1 शमू 14:29योनातान ने कहा, “मेरे पिता ने लोगों को कष्ट दिया है; देखो, मैंने इस मधु को थोड़ा सा चखा, और मेरी आँखें कैसी चमक उठी हैं।
  • मित्र दाऊद के भूखे लोगों के लिये मधु लाए2 शमू 17:29
    पद
    2 शमू 17:29मधु, मक्खन, भेड़-बकरियाँ, और गाय के दही का पनीर, दाऊद और उसके संगियों के खाने को यह सोचकर ले आए, “जंगल में वे लोग भूखे प्यासे और थके-माँदे होंगे।”
  • यारोबाम की पत्नी नबी के पास एक कुप्पी मधु ले गई1 राजा 14:3
    पद
    1 राजा 14:3उसके पास तू दस रोटी, और टिकियाँ और एक कुप्पी मधु लिये हुए जा, और वह तुझे बताएगा कि लड़के का क्या होगा।”
  • यहूदा सोर के साथ मधु का व्यापार करता थायहे 27:17
    पद
    यहे 27:17यहूदा और इस्राएल भी तेरे व्यापारी थे; उन्होंने मिन्नीत का गेहूँ, पन्नग, और मधु, तेल, और बलसान देकर तेरा माल लिया।
  • यूहन्ना टिड्डियाँ और वनमधु खाता थामत्ती 3:4
    पद
    मत्ती 3:4यह यूहन्ना ऊँट के रोम का वस्त्र पहने था, और अपनी कमर में चमड़े का कमरबन्द बाँधे हुए था, और उसका भोजन टिड्डियाँ और वनमधु था।

वचन

  • हे मेरे पुत्र, तू मधु खा, क्योंकि वह अच्छा हैनीति 24:13
    पद
    नीति 24:13हे मेरे पुत्र तू मधु खा, क्योंकि वह अच्छा है, और मधु का छत्ता भी, क्योंकि वह तेरे मुँह में मीठा लगेगा।
  • मधु मिले तो उतना ही खा जितना तेरे लिये ठीक होनीति 25:16, नीति 25:27
    पद
    नीति 25:16क्या तूने मधु पाया? तो जितना तेरे लिये ठीक हो उतना ही खाना, ऐसा न हो कि अधिक खाकर उसे उगल दे।
    नीति 25:27जैसे बहुत मधु खाना अच्छा नहीं, वैसे ही आत्मप्रशंसा करना भी अच्छा नहीं।
  • सन्तुष्ट को मधु का छत्ता भी फीका लगता है; भूखे को कड़वा भी मीठानीति 27:7
    पद
    नीति 27:7सन्तुष्ट होने पर मधु का छत्ता भी फीका लगता है, परन्तु भूखे को सब कड़वी वस्तुएँ भी मीठी जान पड़ती हैं।
  • छत्ते से टपकनेवाले मधु से भी बढ़कर मधुरभज 19:10
    पद
    भज 19:10वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और छत्ते से टपकनेवाले मधु से भी बढ़कर मधुर हैं।
  • हे मेरी दुल्हन, तेरे होठों से मधु टपकता हैश्रेष्ठ 4:11
    पद
    श्रेष्ठ 4:11हे मेरी दुल्हन, तेरे होठों से मधु टपकता है; तेरी जीभ के नीचे मधु और दूध रहता है; तेरे वस्त्रों का सुगन्ध लबानोन के समान है।

स्रोत

Nave’s Topical Bible (Orville J. Nave, 1896; सार्वजनिक क्षेत्र) से: विषय चुने गए, पंक्तियाँ संक्षिप्त करके आधुनिक शब्दों में रखी गईं, व्याख्या की पंक्तियाँ छोड़ दी गईं; हर पद जाँचा गया।

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी · © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions, CC BY-SA 4.0; changed: footnotes, headings, the cross references printed in the verses, the speakers' labels in the Song of Songs and the letters over Psalm 119 left out.