अन्वेषण › विषय › चालीस की संख्या
आश्चर्यजनक बातें
बाइबल में चालीस की संख्या
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी के 31 अंश, पंक्ति-दर-पंक्ति, Nave’s Topical Bible से।
चालीस दिन
- पृथ्वी पर चालीस दिन और चालीस रात वर्षा होती रहीउत्प 7:4, उत्प 7:12, उत्प 7:17
पद
उत्प 7:4क्योंकि अब सात दिन और बीतने पर मैं पृथ्वी पर चालीस दिन और चालीस रात तक जल बरसाता रहूँगा; और जितने प्राणी मैंने बनाए हैं उन सब को भूमि के ऊपर से मिटा दूँगा।”
उत्प 7:12और वर्षा चालीस दिन और चालीस रात निरन्तर पृथ्वी पर होती रही।
उत्प 7:17पृथ्वी पर चालीस दिन तक जल-प्रलय होता रहा; और पानी बहुत बढ़ता ही गया, जिससे जहाज ऊपर को उठने लगा, और वह पृथ्वी पर से ऊँचा उठ गया।
- चालीस दिन के बाद नूह ने जहाज की खिड़की खोलीउत्प 8:6
पद
उत्प 8:6फिर ऐसा हुआ कि चालीस दिन के पश्चात् नूह ने अपने बनाए हुए जहाज की खिड़की को खोलकर,
- याकूब के शव में सुगन्ध-द्रव्य भरने में चालीस दिन लगेउत्प 50:3
पद
उत्प 50:3और उसके चालीस दिन पूरे हुए, क्योंकि जिनके शव में सुगन्ध-द्रव्य भरे जाते हैं, उनको इतने ही दिन पूरे लगते है; और मिस्री लोग उसके लिये सत्तर दिन तक विलाप करते रहे।
- मूसा पर्वत पर चालीस दिन और चालीस रात रहानिर्ग 24:18, निर्ग 34:28, व्यव 9:9
पद
निर्ग 24:18तब मूसा बादल के बीच में प्रवेश करके पर्वत पर चढ़ गया। और मूसा पर्वत पर चालीस दिन और चालीस रात रहा।
निर्ग 34:28मूसा तो वहाँ यहोवा के संग चालीस दिन और रात रहा; और तब तक न तो उसने रोटी खाई और न पानी पिया। और उसने उन तख्तियों पर वाचा के वचन अर्थात् दस आज्ञाएँ लिख दीं।
व्यव 9:9जब मैं उस वाचा के पत्थर की पटियाओं को जो यहोवा ने तुम से बाँधी थी लेने के लिये पर्वत के ऊपर चढ़ गया, तब चालीस दिन और चालीस रात पर्वत ही के ऊपर रहा; और मैंने न तो रोटी खाई न पानी पिया।
- भेदिए चालीस दिन के बाद लौट आएगिन 13:25
पद
गिन 13:25चालीस दिन के बाद वे उस देश का भेद लेकर लौट आए।
- गोलियत चालीस दिन तक सवेरे और साँझ को निकल आता था1 शमू 17:16
पद
1 शमू 17:16वह पलिश्ती तो चालीस दिन तक सवेरे और साँझ को निकट जाकर खड़ा हुआ करता था।
- एलिय्याह चालीस दिन-रात चलकर होरेब पहुँचा1 राजा 19:8
पद
1 राजा 19:8तब उसने उठकर खाया पिया; और उसी भोजन से बल पाकर चालीस दिन-रात चलते-चलते परमेश्वर के पर्वत होरेब को पहुँचा।
- योना: चालीस दिन के बीतने पर नीनवे उलट दिया जाएगायोना 3:4
पद
योना 3:4और योना ने नगर में प्रवेश करके एक दिन की यात्रा पूरी की, और यह प्रचार करता गया, “अब से चालीस दिन के बीतने पर नीनवे उलट दिया जाएगा।”
- यीशु ने चालीस दिन और चालीस रात उपवास कियामत्ती 4:2
पद
मत्ती 4:2वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, तब उसे भूख लगी।
- जी उठने के बाद यीशु चालीस दिन तक दिखाई देता रहाप्रेरि 1:3
पद
प्रेरि 1:3और यीशु के दुःख उठाने के बाद बहुत से पक्के प्रमाणों से अपने आपको उन्हें जीवित दिखाया, और चालीस दिन तक वह प्रेरितों को दिखाई देता रहा, और परमेश्वर के राज्य की बातें करता रहा।
चालीस वर्ष
- इस्राएल चालीस वर्ष तक जंगल में मन्ना खाता रहानिर्ग 16:35
पद
निर्ग 16:35इस्राएली जब तक बसे हुए देश में न पहुँचे तब तक, अर्थात् चालीस वर्ष तक मन्ना खाते रहे; वे जब तक कनान देश की सीमा पर नहीं पहुँचे तब तक मन्ना खाते रहे।
- चालीस वर्ष का भटकना, भेद लेने के हर दिन के बदले एक वर्षगिन 14:34
पद
गिन 14:34जितने दिन तुम उस देश का भेद लेते रहे, अर्थात् चालीस दिन उनकी गिनती के अनुसार, एक दिन के बदले एक वर्ष, अर्थात् चालीस वर्ष तक तुम अपने अधर्म का दण्ड उठाए रहोगे, तब तुम जान लोगे कि मेरा विरोध क्या है।
- इसहाक ने चालीस वर्ष का होकर रिबका से विवाह कियाउत्प 25:20
पद
उत्प 25:20और इसहाक ने चालीस वर्ष का होकर रिबका को, जो पद्दनराम के वासी, अरामी बतूएल की बेटी, और अरामी लाबान की बहन थी, ब्याह लिया।
- मूसा चालीस वर्ष का था जब वह अपने भाइयों से मिलने गया; चालीस वर्ष बाद, झाड़ीप्रेरि 7:23, प्रेरि 7:30
पद
प्रेरि 7:23“जब वह चालीस वर्ष का हुआ, तो उसके मन में आया कि अपने इस्राएली भाइयों से भेंट करे।
प्रेरि 7:30“जब पूरे चालीस वर्ष बीत गए, तो एक स्वर्गदूत ने सीनै पहाड़ के जंगल में उसे जलती हुई झाड़ी की ज्वाला में दर्शन दिया।
- कई न्यायियों के समय देश में चालीस वर्ष तक शान्ति रहीन्याय 3:11, न्याय 5:31, न्याय 8:28
पद
न्याय 3:11तब चालीस वर्ष तक देश में शान्ति बनी रही। तब कनजी का पुत्र ओत्नीएल मर गया।
न्याय 5:31“हे यहोवा, “तेरे सब शत्रु ऐसे ही नाश हो जाएँ! परन्तु उसके प्रेमी लोग प्रताप के साथ उदय होते हुए सूर्य के समान तेजोमय हों।” फिर देश में चालीस वर्ष तक शान्ति रही।
न्याय 8:28इस प्रकार मिद्यान इस्राएलियों से दब गया, और फिर सिर न उठाया। और गिदोन के जीवन भर अर्थात् चालीस वर्ष तक देश चैन से रहा।
- पलिश्तियों ने चालीस वर्ष तक इस्राएल पर राज्य कियान्याय 13:1
पद
न्याय 13:1इस्राएलियों ने फिर यहोवा की दृष्टि में बुरा किया; इसलिए यहोवा ने उनको पलिश्तियों के वश में चालीस वर्ष के लिये रखा।
- एली ने चालीस वर्ष तक इस्राएल का न्याय किया1 शमू 4:18
पद
1 शमू 4:18जैसे ही उसने परमेश्वर के सन्दूक का नाम लिया वैसे ही एली फाटक के पास कुर्सी पर से पछाड़ खाकर गिर पड़ा; और बूढ़ा और भारी होने के कारण उसकी गर्दन टूट गई, और वह मर गया। उसने तो इस्राएलियों का न्याय चालीस वर्ष तक किया था।
- पौलुस के अनुसार शाऊल के अधीन चालीस वर्षप्रेरि 13:21
पद
प्रेरि 13:21उसके बाद उन्होंने एक राजा माँगा; तब परमेश्वर ने चालीस वर्ष के लिये बिन्यामीन के गोत्र में से एक मनुष्य अर्थात् कीश के पुत्र शाऊल को उन पर राजा ठहराया।
- दाऊद ने चालीस वर्ष राज्य किया: सात हेब्रोन में, तैंतीस यरूशलेम में2 शमू 5:4, 1 राजा 2:11
पद
2 शमू 5:4दाऊद तीस वर्ष का होकर राज्य करने लगा, और चालीस वर्ष तक राज्य करता रहा।
1 राजा 2:11दाऊद ने इस्राएल पर चालीस वर्ष राज्य किया, सात वर्ष तो उसने हेब्रोन में और तैंतीस वर्ष यरूशलेम में राज्य किया था।
- सुलैमान ने चालीस वर्ष राज्य किया1 राजा 11:42
पद
1 राजा 11:42सुलैमान को यरूशलेम में सब इस्राएल पर राज्य करते हुए चालीस वर्ष बीते।
- योआश ने यरूशलेम में चालीस वर्ष राज्य किया2 राजा 12:1
पद
2 राजा 12:1येहू के राज्य के सातवें वर्ष में योआश राज्य करने लगा, और यरूशलेम में चालीस वर्ष तक राज्य करता रहा। उसकी माता का नाम सिब्या था जो बेर्शेबा की थी।
चालीस कोड़े
- व्यवस्था चालीस कोड़ों से अधिक की अनुमति नहीं देती थीव्यव 25:3
पद
व्यव 25:3वह उसे चालीस कोड़े तक लगवा सकता है, इससे अधिक नहीं लगवा सकता; ऐसा न हो कि इससे अधिक बहुत मार खिलवाने से तेरा भाई तेरी दृष्टि में तुच्छ ठहरे।
- पौलुस ने पाँच बार चालीस में एक कम कोड़े खाए2 कुरि 11:24
पद
2 कुरि 11:24पाँच बार मैंने यहूदियों के हाथ से उनतालीस कोड़े खाए।
स्रोत
Nave’s Topical Bible (Orville J. Nave, 1896; सार्वजनिक क्षेत्र) से: विषय चुने गए, पंक्तियाँ संक्षिप्त करके आधुनिक शब्दों में रखी गईं, व्याख्या की पंक्तियाँ छोड़ दी गईं; हर पद जाँचा गया।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी · © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions, CC BY-SA 4.0; changed: footnotes, headings, the cross references printed in the verses, the speakers' labels in the Song of Songs and the letters over Psalm 119 left out.