रोज़मर्रा का जीवन
बाइबल में झगड़े
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी के 32 अंश, पंक्ति-दर-पंक्ति, Nave’s Topical Bible से।
उदाहरण
- अब्राम और लूत के चरवाहों में झगड़ा होता है, इसलिए दोनों अलग हो जाते हैंउत्प 13:7–9
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उत्प 13:7–9सो अब्राम, और लूत की भेड़-बकरी, और गाय-बैल के चरवाहों में झगड़ा हुआ। उस समय कनानी, और परिज्जी लोग, उस देश में रहते थे। तब अब्राम लूत से कहने लगा, “मेरे और तेरे बीच, और मेरे और तेरे चरवाहों के बीच में झगड़ा न होने पाए; क्योंकि हम लोग भाई-बन्धु हैं। क्या सारा देश तेरे सामने नहीं? सो मुझसे अलग हो, यदि तू बाईं ओर जाए तो मैं दाहिनी ओर जाऊँगा; और यदि तू दाहिनी ओर जाए तो मैं बाईं ओर जाऊँगा।”
- अब्राहम अबीमेलेक के दासों के छीने हुए कुएँ के विषय में उलाहना देता हैउत्प 21:25
पद
उत्प 21:25और अब्राहम ने अबीमेलेक को एक कुएँ के विषय में जो अबीमेलेक के दासों ने बलपूर्वक ले लिया था, उलाहना दिया।
- मूसा दो इब्रियों को आपस में मारपीट करते पाता हैनिर्ग 2:13, प्रेरि 7:26
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निर्ग 2:13फिर दूसरे दिन बाहर जाकर उसने देखा कि दो इब्री पुरुष आपस में मारपीट कर रहे हैं; उसने अपराधी से कहा, “तू अपने भाई को क्यों मारता है?”
प्रेरि 7:26दूसरे दिन जब इस्राएली आपस में लड़ रहे थे, तो वह वहाँ जा पहुँचा; और यह कहकर उन्हें मेल करने के लिये समझाया, कि हे पुरुषों, ‘तुम तो भाई-भाई हो, एक दूसरे पर क्यों अन्याय करते हो?’
- मूसा अकेला लोगों के सब झगड़ों का भार नहीं सह सकताव्यव 1:12
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व्यव 1:12परन्तु तुम्हारे झंझट, और भार, और झगड़ों को मैं अकेला कहाँ तक सह सकता हूँ।
- एप्रैम यिप्तह को धमकाता है; यरदन के घाटों पर “शिब्बोलेत”न्याय 12:1–6
पद
न्याय 12:1–6तब एप्रैमी पुरुष इकट्ठे होकर सापोन को जाकर यिप्तह से कहने लगे, “जब तू अम्मोनियों से लड़ने को गया तब हमें संग चलने को क्यों नहीं बुलवाया? हम तेरा घर तुझ समेत जला देंगे।” यिप्तह ने उनसे कहा, “मेरा और मेरे लोगों का अम्मोनियों से बड़ा झगड़ा हुआ था; और जब मैंने तुम से सहायता माँगी, तब तुम ने मुझे उनके हाथ से नहीं बचाया। तब यह देखकर कि तुम मुझे नहीं बचाते मैं अपने प्राणों को हथेली पर रखकर अम्मोनियों के विरुद्ध चला, और यहोवा ने उनको मेरे हाथ में कर दिया; फिर तुम अब मुझसे लड़ने को क्यों चढ़ आए हो?” तब यिप्तह गिलाद के सब पुरुषों को इकट्ठा करके एप्रैम से लड़ा, एप्रैम जो कहता था, “हे गिलादियों, तुम तो एप्रैम और मनश्शे के बीच रहनेवाले एप्रैमियों के भगोड़े हो,” और गिलादियों ने उनको मार लिया। और गिलादियों ने यरदन का घाट उनसे पहले अपने वश में कर लिया। और जब कोई एप्रैमी भगोड़ा कहता, “मुझे पार जाने दो,” तब गिलाद के पुरुष उससे पूछते थे, “क्या तू एप्रैमी है?” और यदि वह कहता, “नहीं,” तो वे उससे कहते, “अच्छा, शिब्बोलेत कह,” और वह कहता, “सिब्बोलेत,” क्योंकि उससे वह ठीक से बोला नहीं जाता था; तब वे उसको पकड़कर यरदन के घाट पर मार डालते थे। इस प्रकार उस समय बयालीस हजार एप्रैमी मारे गए।
- तकोआ की स्त्री की कहानी: दो बेटे मैदान में मारपीट करते हैं2 शमू 14:6
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2 शमू 14:6और तेरी दासी के दो बेटे थे, और उन दोनों ने मैदान में मारपीट की; और उनको छुड़ानेवाला कोई न था, इसलिए एक ने दूसरे को ऐसा मारा कि वह मर गया।
- चेले आपस में विवाद करते हैं कि उनमें बड़ा कौन हैमर 9:33–34, लूका 22:24
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मर 9:33–34फिर वे कफरनहूम में आए; और घर में आकर उसने उनसे पूछा, “रास्ते में तुम किस बात पर विवाद कर रहे थे?” वे चुप रहे क्योंकि, मार्ग में उन्होंने आपस में यह वाद-विवाद किया था, कि हम में से बड़ा कौन है?
लूका 22:24उनमें यह वाद-विवाद भी हुआ; कि हम में से कौन बड़ा समझा जाता है?
- अन्ताकिया में खतने को लेकर बहुत विवादप्रेरि 15:1–2
पद
प्रेरि 15:1–2फिर कुछ लोग यहूदिया से आकर भाइयों को सिखाने लगे: “यदि मूसा की रीति पर तुम्हारा खतना न हो तो तुम उद्धार नहीं पा सकते।” जब पौलुस और बरनबास का उनसे बहुत मतभेद और विवाद हुआ तो यह ठहराया गया, कि पौलुस और बरनबास, और उनमें से कुछ व्यक्ति इस बात के विषय में प्रेरितों और प्राचीनों के पास यरूशलेम को जाएँ।
- मरकुस के कारण पौलुस और बरनबास अलग हो जाते हैंप्रेरि 15:37–39
पद
प्रेरि 15:37–39तब बरनबास ने यूहन्ना को जो मरकुस कहलाता है, साथ लेने का विचार किया। परन्तु पौलुस ने उसे जो पंफूलिया में उनसे अलग हो गया था, और काम पर उनके साथ न गया, साथ ले जाना अच्छा न समझा। अतः ऐसा विवाद उठा कि वे एक दूसरे से अलग हो गए; और बरनबास, मरकुस को लेकर जहाज से साइप्रस को चला गया।
- पुनरुत्थान को लेकर फरीसियों और सदूकियों में झगड़ाप्रेरि 23:7–10
पद
प्रेरि 23:7–10जब उसने यह बात कही तो फरीसियों और सदूकियों में झगड़ा होने लगा; और सभा में फूट पड़ गई। क्योंकि सदूकी तो यह कहते हैं, कि न पुनरुत्थान है, न स्वर्गदूत और न आत्मा है; परन्तु फरीसी इन सब को मानते हैं। तब बड़ा हल्ला मचा और कुछ शास्त्री जो फरीसियों के दल के थे, उठकर यह कहकर झगड़ने लगे, “हम इस मनुष्य में कुछ बुराई नहीं पाते; और यदि कोई आत्मा या स्वर्गदूत उससे बोला है तो फिर क्या?” जब बहुत झगड़ा हुआ, तो सैन्य-दल के सरदार ने इस डर से कि वे पौलुस के टुकड़े-टुकड़े न कर डालें, सैन्य-दल को आज्ञा दी कि उतरकर उसको उनके बीच में से जबरदस्ती निकालो, और गढ़ में ले आओ।
- पौलुस अन्ताकिया में कैफा के मुँह पर उसका सामना करता हैगला 2:11
पद
गला 2:11पर जब कैफा अन्ताकिया में आया तो मैंने उसके मुँह पर उसका सामना किया, क्योंकि वह दोषी ठहरा था।
- कुरिन्थुस के लोग: “पौलुस का,” “अपुल्लोस का”1 कुरि 1:11–12
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1 कुरि 1:11–12क्योंकि हे मेरे भाइयों, खलोए के घराने के लोगों ने मुझे तुम्हारे विषय में बताया है, कि तुम में झगड़े हो रहे हैं। मेरा कहना यह है, कि तुम में से कोई तो अपने आपको “पौलुस का,” कोई “अपुल्लोस का,” कोई “कैफा का,” कोई “मसीह का” कहता है।
- विश्वासी एक दूसरे पर मुकद्दमा करते हैं1 कुरि 6:6–7
पद
1 कुरि 6:6–7वरन् भाई-भाई में मुकद्दमा होता है, और वह भी अविश्वासियों के सामने। सचमुच तुम में बड़ा दोष तो यह है, कि आपस में मुकद्दमा करते हो। वरन् अन्याय क्यों नहीं सहते? अपनी हानि क्यों नहीं सहते?
- पौलुस यूओदिया और सुन्तुखे से एक मन रहने का निवेदन करता हैफिलि 4:2
पद
फिलि 4:2मैं यूओदिया से निवेदन करता हूँ, और सुन्तुखे से भी, कि वे प्रभु में एक मन रहें।
व्यवस्था में
- झगड़े में घायल को उसके काम की हानि और इलाज का खर्च दिया जाता हैनिर्ग 21:18–19
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निर्ग 21:18–19“यदि मनुष्य झगड़ते हों, और एक दूसरे को पत्थर या मुक्के से ऐसा मारे कि वह मरे नहीं परन्तु बिछौने पर पड़ा रहे, तो जब वह उठकर लाठी के सहारे से बाहर चलने फिरने लगे, तब वह मारनेवाला निर्दोष ठहरे; उस दशा में वह उसके पड़े रहने के समय की हानि भर दे, और उसको भला चंगा भी करा दे।
- मनुष्यों के बीच का झगड़ा न्याय के लिये न्यायियों के पास ले जाया जाता हैव्यव 25:1
पद
व्यव 25:1“यदि मनुष्यों के बीच कोई झगड़ा हो, और वे न्याय करवाने के लिये न्यायियों के पास जाएँ, और वे उनका न्याय करें, तो निर्दोष को निर्दोष और दोषी को दोषी ठहराएँ।
नीतिवचन की कहावतें
- बैर से झगड़े उत्पन्न होते हैं; प्रेम से सब अपराध ढँप जाते हैंनीति 10:12
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नीति 10:12बैर से तो झगड़े उत्पन्न होते हैं, परन्तु प्रेम से सब अपराध ढँप जाते हैं।
- क्रोधी पुरुष झगड़ा मचाता हैनीति 15:18, नीति 29:22
पद
नीति 15:18क्रोधी पुरुष झगड़ा मचाता है, परन्तु जो विलम्ब से क्रोध करनेवाला है, वह मुकद्दमों को दबा देता है।
नीति 29:22क्रोध करनेवाला मनुष्य झगड़ा मचाता है और अत्यन्त क्रोध करनेवाला अपराधी भी होता है।
- चैन के साथ सूखा टुकड़ा झगड़ेवाले भोज से उत्तम हैनीति 17:1
पद
नीति 17:1चैन के साथ सूखा टुकड़ा, उस घर की अपेक्षा उत्तम है, जो मेलबलि-पशुओं से भरा हो, परन्तु उसमें झगड़े-रगड़े हों।
- झगड़े का आरम्भ बाँध के छेद के समान हैनीति 17:14
पद
नीति 17:14झगड़े का आरम्भ बाँध के छेद के समान है, झगड़ा बढ़ने से पहले उसको छोड़ देना उचित है।
- मुकद्दमे से हाथ उठाना पुरुष की महिमा है; सब मूर्ख झगड़ने को तैयार होते हैंनीति 20:3
पद
नीति 20:3मुकद्दमे से हाथ उठाना, पुरुष की महिमा ठहरती है; परन्तु सब मूर्ख झगड़ने को तैयार होते हैं।
- ठट्ठा करनेवाले को निकाल दे, तब झगड़ा मिट जाएगानीति 22:10
पद
नीति 22:10ठट्ठा करनेवाले को निकाल दे, तब झगड़ा मिट जाएगा, और वाद-विवाद और अपमान दोनों टूट जाएँगे।
- पराए झगड़े में पड़ना कुत्ते को कानों से पकड़ने के समान हैनीति 26:17
पद
नीति 26:17जो मार्ग पर चलते हुए पराए झगड़े में विघ्न डालता है, वह उसके समान है, जो कुत्ते को कानों से पकड़ता है।
- झगड़ालू पत्नी झड़ी के दिन लगातार टपकते पानी के समान हैनीति 27:15, नीति 25:24
पद
नीति 27:15झड़ी के दिन पानी का लगातार टपकना, और झगड़ालू पत्नी दोनों एक से हैं;
नीति 25:24लम्बे चौड़े घर में झगड़ालू पत्नी के संग रहने से छत के कोने पर रहना उत्तम है।
अन्य स्थानों में
- मार्ग में ही अपने मुद्दई से झटपट मेल कर लेमत्ती 5:25
पद
मत्ती 5:25जब तक तू अपने मुद्दई के साथ मार्ग में है, उससे झटपट मेल मिलाप कर ले कहीं ऐसा न हो कि मुद्दई तुझे न्यायाधीश को सौंपे, और न्यायाधीश तुझे सिपाही को सौंप दे और तू बन्दीगृह में डाल दिया जाए।
- जहाँ तक हो सके, सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखोरोम 12:18
पद
रोम 12:18जहाँ तक हो सके, तुम भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो।
- मूर्खता के विवादों से झगड़े होते हैं2 तीमु 2:23–24
पद
2 तीमु 2:23–24पर मूर्खता, और अविद्या के विवादों से अलग रह; क्योंकि तू जानता है, कि इनसे झगड़े होते हैं। और प्रभु के दास को झगड़ालू नहीं होना चाहिए, पर सब के साथ कोमल और शिक्षा में निपुण, और सहनशील हो।
- “तुम में लड़ाइयाँ और झगड़े कहाँ से आते है?”याकू 4:1
पद
याकू 4:1तुम में लड़ाइयाँ और झगड़े कहाँ से आते है? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं?
स्रोत
Nave’s Topical Bible (Orville J. Nave, 1896; सार्वजनिक क्षेत्र) से: विषय चुने गए, पंक्तियाँ संक्षिप्त करके आधुनिक शब्दों में रखी गईं, व्याख्या की पंक्तियाँ छोड़ दी गईं; हर पद जाँचा गया।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी · © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions, CC BY-SA 4.0; changed: footnotes, headings, the cross references printed in the verses, the speakers' labels in the Song of Songs and the letters over Psalm 119 left out.