रोज़मर्रा का जीवन
बाइबल में भोजन
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी के 38 अंश, पंक्ति-दर-पंक्ति, Nave’s Topical Bible से।
लोग क्या खाते थे
- घराने के लिये बकरियों का दूधनीति 27:27
पद
नीति 27:27और बकरियों का इतना दूध होगा कि तू अपने घराने समेत पेट भरकर पिया करेगा, और तेरी दासियों का भी जीवन निर्वाह होता रहेगा।
- गायों का दही, दूध, मेम्नों की चर्बी और उत्तम गेहूँव्यव 32:14
पद
व्यव 32:14गायों का दही, और भेड़-बकरियों का दूध, मेम्नों की चर्बी, बकरे और बाशान की जाति के मेढ़े, और गेहूँ का उत्तम से उत्तम आटा भी खाया; और तू दाखरस का मधु पिया करता था।
- सहस्त्रपति के लिये पनीर की दस टिकियाँ1 शमू 17:17–18
पद
1 शमू 17:17–18यिशै ने अपने पुत्र दाऊद से कहा, “यह एपा भर भुना हुआ अनाज, और ये दस रोटियाँ लेकर छावनी में अपने भाइयों के पास दौड़ जा; और पनीर की ये दस टिकियाँ उनके सहस्त्रपति के लिये ले जा। और अपने भाइयों का कुशल देखकर उनकी कोई निशानी ले आना।
- दाऊद के लोगों के लिये गेहूँ, जौ, लोबिया, मसूर, मधु और पनीर2 शमू 17:28–29
पद
2 शमू 17:28–29चारपाइयाँ, तसले मिट्टी के बर्तन, गेहूँ, जौ, मैदा, लोबिया, मसूर, भुने चने, मधु, मक्खन, भेड़-बकरियाँ, और गाय के दही का पनीर, दाऊद और उसके संगियों के खाने को यह सोचकर ले आए, “जंगल में वे लोग भूखे प्यासे और थके-माँदे होंगे।”
- अब्राहम रोटी, कोमल बछड़ा, दही और दूध परोसता हैउत्प 18:5–8
पद
उत्प 18:5–8फिर मैं एक टुकड़ा रोटी ले आऊँ, और उससे आप अपने-अपने जीव को तृप्त करें; तब उसके पश्चात् आगे बढ़ें क्योंकि आप अपने दास के पास इसी लिए पधारे हैं।” उन्होंने कहा, “जैसा तू कहता है वैसा ही कर।” तब अब्राहम तुरन्त तम्बू में सारा के पास गया और कहा, “तीन सआ मैदा जल्दी से गूँध, और फुलके बना।” फिर अब्राहम गाय-बैल के झुण्ड में दौड़ा, और एक कोमल और अच्छा बछड़ा लेकर अपने सेवक को दिया, और उसने जल्दी से उसको पकाया। तब उसने दही, और दूध, और बछड़े का माँस, जो उसने पकवाया था, लेकर उनके आगे परोस दिया; और आप वृक्ष के तले उनके पास खड़ा रहा, और वे खाने लगे।
- रूत रोटी सिरके में डुबोती है और भुनी हुई बालें खाती हैरूत 2:14
पद
रूत 2:14फिर खाने के समय बोअज ने उससे कहा, “यहीं आकर रोटी खा, और अपना कौर सिरके में डूबा।” तो वह लवनेवालों के पास बैठ गई; और उसने उसको भुनी हुई बालें दीं; और वह खाकर तृप्त हुई, वरन् कुछ बचा भी रखा।
- हर एक के लिये रोटी, खजूर की टिकिया और किशमिश की टिकिया2 शमू 6:19
पद
2 शमू 6:19तब उसने समस्त प्रजा को, अर्थात्, क्या स्त्री क्या पुरुष, समस्त इस्राएली भीड़ के लोगों को एक-एक रोटी, और एक-एक टुकड़ा माँस, और किशमिश की एक-एक टिकिया बँटवा दी। तब प्रजा के सब लोग अपने-अपने घर चले गए।
- अबीगैल रोटियाँ, दाखमधु, भेड़ें, किशमिश और अंजीरों की टिकियाँ लाती है1 शमू 25:18
पद
1 शमू 25:18तब अबीगैल ने फुर्ती से दो सौ रोटी, और दो कुप्पी दाखमधु, और पाँच भेड़ों का माँस, और पाँच सआ भूना हुआ अनाज, और एक सौ गुच्छे किशमिश, और अंजीरों की दो सौ टिकियाँ लेकर गदहों पर लदवाई।
- सीबा दाऊद के लिये रोटी, किशमिश और धूपकाल के फल लाता है2 शमू 16:1–2
पद
2 शमू 16:1–2दाऊद चोटी पर से थोड़ी दूर बढ़ गया था, कि मपीबोशेत का कर्मचारी सीबा एक जोड़ी, जीन बाँधे हुए गदहों पर दो सौ रोटी, किशमिश की एक सौ टिकियाँ, धूपकाल के फल की एक सौ टिकियाँ, और कुप्पी भर दाखमधु, लादे हुए उससे आ मिला। राजा ने सीबा से पूछा, “इनसे तेरा क्या प्रयोजन है?” सीबा ने कहा, “गदहे तो राजा के घराने की सवारी के लिये हैं, और रोटी और धूपकाल के फल जवानों के खाने के लिये हैं, और दाखमधु इसलिए है कि जो कोई जंगल में थक जाए वह उसे पीए।”
- भूखा मिस्री अंजीर की टिकिया और किशमिश खाकर जी उठता है1 शमू 30:11–12
पद
1 शमू 30:11–12उनको एक मिस्री पुरुष मैदान में मिला, उन्होंने उसे दाऊद के पास ले जाकर रोटी दी; और उसने उसे खाया, तब उसे पानी पिलाया, फिर उन्होंने उसको अंजीर की टिकिया का एक टुकड़ा और दो गुच्छे किशमिश दिए। और जब उसने खाया, तब उसके जी में जी आया; उसने तीन दिन और तीन रात से न तो रोटी खाई थी और न पानी पिया था।
- मिस्र में मछलियाँ, खीरे, खरबूजे, गन्दने, प्याज और लहसुनगिन 11:5
पद
गिन 11:5हमें वे मछलियाँ स्मरण हैं जो हम मिस्र में सेंत-मेंत खाया करते थे, और वे खीरे, और खरबूजे, और गन्दने, और प्याज, और लहसुन भी;
- रोटी और मसूर की दालउत्प 25:34
पद
उत्प 25:34इस पर याकूब ने एसाव को रोटी और पकाई हुई मसूर की दाल दी; और उसने खाया पिया, तब उठकर चला गया। इस प्रकार एसाव ने अपना पहलौठे का अधिकार तुच्छ जाना।
- मन्ना का स्वाद मधु के बने पूए का सा थानिर्ग 16:31
पद
निर्ग 16:31इस्राएल के घराने ने उस वस्तु का नाम मन्ना रखा; और वह धनिया के समान श्वेत था, और उसका स्वाद मधु के बने हुए पूए का सा था।
- देश का भुना हुआ दाना; फिर मन्ना बन्द हो जाता हैयहो 5:11–12
पद
यहो 5:11–12और फसह के दूसरे दिन वे उस देश की उपज में से अख़मीरी रोटी और उसी दिन से भुना हुआ दाना भी खाने लगे। और जिस दिन वे उस देश की उपज में से खाने लगे, उसी दिन सवेरे को मन्ना बन्द हो गया; और इस्राएलियों को आगे फिर कभी मन्ना न मिला, परन्तु उस वर्ष उन्होंने कनान देश की उपज में से खाया।
- गेहूँ, जौ, सेम, मसूर, बाजरा और कठिया गेहूँ की रोटीयहे 4:9
पद
यहे 4:9“तू गेहूँ, जौ, सेम, मसूर, बाजरा, और कठिया गेहूँ, लेकर एक बर्तन में रखकर उनसे रोटी बनाया करना। जितने दिन तू अपने करवट के बल लेटा रहेगा, उतने अर्थात् तीन सौ नब्बे दिन तक उसे खाया करना।
- दानिय्येल केवल साग-पात और पानी माँगता हैदानि 1:12
पद
दानि 1:12“मैं तुझ से विनती करता हूँ, अपने दासों को दस दिन तक जाँच, हमारे खाने के लिये साग-पात और पीने के लिये पानी ही दिया जाए।
- कौवे सवेरे और साँझ को एलिय्याह के पास रोटी और माँस लाते हैं1 राजा 17:6
पद
1 राजा 17:6और सवेरे और साँझ को कौवे उसके पास रोटी और माँस लाया करते थे और वह नदी का पानी पिया करता था।
- यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला टिड्डियाँ और वनमधु खाता थामत्ती 3:4
पद
मत्ती 3:4यह यूहन्ना ऊँट के रोम का वस्त्र पहने था, और अपनी कमर में चमड़े का कमरबन्द बाँधे हुए था, और उसका भोजन टिड्डियाँ और वनमधु था।
- प्रेमवाले घर में साग-पात, बैरवाले घर के पले हुए बैल से उत्तम हैनीति 15:17
पद
नीति 15:17प्रेमवाले घर में सागपात का भोजन, बैरवाले घर में स्वादिष्ट माँस खाने से उत्तम है।
- पुत्र रोटी या मछली माँगता हैमत्ती 7:9–10
पद
मत्ती 7:9–10“तुम में से ऐसा कौन मनुष्य है, कि यदि उसका पुत्र उससे रोटी माँगे, तो वह उसे पत्थर दे? या मछली माँगे, तो उसे साँप दे?
- झील के किनारे कोयले की आग पर मछली और रोटीयूह 21:9
पद
यूह 21:9जब किनारे पर उतरे, तो उन्होंने कोयले की आग, और उस पर मछली रखी हुई, और रोटी देखी।
- जी उठा यीशु भुनी मछली का टुकड़ा खाता हैलूका 24:42
पद
लूका 24:42उन्होंने उसे भुनी मछली का टुकड़ा दिया।
भोजन के समय
- रिबका बकरी के दो बच्चों से स्वादिष्ट भोजन बनाती हैउत्प 27:9
पद
उत्प 27:9कि बकरियों के पास जाकर बकरियों के दो अच्छे-अच्छे बच्चे ले आ; और मैं तेरे पिता के लिये उसकी रूचि के अनुसार उनके माँस का स्वादिष्ट भोजन बनाऊँगी।
- स्त्रियाँ रसोई और रोटियाँ बनाने का काम करती थीं1 शमू 8:13, नीति 31:15
पद
1 शमू 8:13फिर वह तुम्हारी बेटियों को लेकर उनसे सुगन्ध-द्रव्य और रसोई और रोटियाँ बनवाएगा।
नीति 31:15वह रात ही को उठ बैठती है, और अपने घराने को भोजन खिलाती है और अपनी दासियों को अलग-अलग काम देती है।
- मिस्री इब्रियों के साथ भोजन नहीं करते थेउत्प 43:32
पद
उत्प 43:32तब उन्होंने उसके लिये तो अलग, और भाइयों के लिये भी अलग, और जो मिस्री उसके संग खाते थे, उनके लिये भी अलग, भोजन परोसा; इसलिए कि मिस्री इब्रियों के साथ भोजन नहीं कर सकते, वरन् मिस्री ऐसा करना घृणित समझते थे।
- रोटी तोड़ने से पहले धन्यवादमर 8:6, लूका 24:30, प्रेरि 27:35
पद
मर 8:6तब उसने लोगों को भूमि पर बैठने की आज्ञा दी, और वे सात रोटियाँ लीं, और धन्यवाद करके तोड़ीं, और अपने चेलों को देता गया कि उनके आगे रखें, और उन्होंने लोगों के आगे परोस दिया।
लूका 24:30जब वह उनके साथ भोजन करने बैठा, तो उसने रोटी लेकर धन्यवाद किया, और उसे तोड़कर उनको देने लगा।
प्रेरि 27:35और यह कहकर उसने रोटी लेकर सब के सामने परमेश्वर का धन्यवाद किया और तोड़कर खाने लगा।
- अन्तिम भोज के बाद भजन गाया जाता हैमत्ती 26:30
पद
मत्ती 26:30फिर वे भजन गाकर जैतून पहाड़ पर गए।
खाने के लिये वर्जित
- थल के पशु: केवल वे जिनके खुर चिरे हों और जो पागुर करेंलैव्य 11:3–4
पद
लैव्य 11:3–4पशुओं में से जितने चिरे या फटे खुर के होते हैं और पागुर करते हैं उन्हें खा सकते हो। परन्तु पागुर करनेवाले या फटे खुरवालों में से इन पशुओं को न खाना, अर्थात् ऊँट, जो पागुर तो करता है परन्तु चिरे खुर का नहीं होता, इसलिए वह तुम्हारे लिये अशुद्ध ठहरा है।
- जलजन्तु: केवल वे जिनके पंख और चोंयेटे होंलैव्य 11:9–10
पद
लैव्य 11:9–10“फिर जितने जलजन्तु हैं उनमें से तुम इन्हें खा सकते हों, अर्थात् समुद्र या नदियों के जलजन्तुओं में से जितनों के पंख और चोंयेटे होते हैं उन्हें खा सकते हो। और जलचरी प्राणियों में से जितने जीवधारी बिना पंख और चोंयेटे के समुद्र या नदियों में रहते हैं वे सब तुम्हारे लिये घृणित हैं।
- उकाब, गिद्ध और गिनाए गए दूसरे पक्षी खाए न जाएँलैव्य 11:13
पद
लैव्य 11:13“फिर पक्षियों में से इनको अशुद्ध जानना, ये अशुद्ध होने के कारण खाए न जाएँ, अर्थात् उकाब, हड़फोड़, कुरर,
- टिड्डियाँ, फनगे, झींगुर और टिड्डे खाए जा सकते हैंलैव्य 11:21–22
पद
लैव्य 11:21–22पर रेंगनेवाले और पंखवाले जो चार पाँवों के बल चलते हैं, जिनके भूमि पर कूदने फाँदने को टाँगें होती हैं उनको तो खा सकते हो। वे ये हैं, अर्थात् भाँति-भाँति की टिड्डी, भाँति-भाँति के फनगे, भाँति-भाँति के झींगुर, और भाँति-भाँति के टिड्डे।
- लहू उण्डेलकर धूलि से ढाँपा जाता हैलैव्य 17:13–14
पद
लैव्य 17:13–14“इस्राएलियों में से या उनके बीच रहनेवाले परदेशियों में से, कोई मनुष्य क्यों न हो, जो शिकार करके खाने के योग्य पशु या पक्षी को पकड़े, वह उसके लहू को उण्डेलकर धूलि से ढाँप दे। क्योंकि शरीर का प्राण जो है वह उसका लहू ही है जो उसके प्राण के साथ एक है; इसलिए मैं इस्राएलियों से कहता हूँ कि किसी प्रकार के प्राणी के लहू को तुम न खाना, क्योंकि सब प्राणियों का प्राण उनका लहू ही है; जो कोई उसको खाए वह नष्ट किया जाएगा।
- मैदान में फाड़े हुए पशु का माँस नहींनिर्ग 22:31
पद
निर्ग 22:31“तुम मेरे लिये पवित्र मनुष्य बनना; इस कारण जो पशु मैदान में फाड़ा हुआ पड़ा मिले उसका माँस न खाना, उसको कुत्तों के आगे फेंक देना।
- बकरी का बच्चा उसकी माता के दूध में न पकानानिर्ग 23:19, व्यव 14:21
पद
निर्ग 23:19अपनी भूमि की पहली उपज का पहला भाग अपने परमेश्वर यहोवा के भवन में ले आना। बकरी का बच्चा उसकी माता के दूध में न पकाना।
व्यव 14:21“जो अपनी मृत्यु से मर जाए उसे तुम न खाना; उसे अपने फाटकों के भीतर किसी परदेशी को खाने के लिये दे सकते हो, या किसी पराए के हाथ बेच सकते हो; परन्तु तू तो अपने परमेश्वर यहोवा के लिये पवित्र प्रजा है। बकरी का बच्चा उसकी माता के दूध में न पकाना।
स्रोत
Nave’s Topical Bible (Orville J. Nave, 1896; सार्वजनिक क्षेत्र) से: विषय चुने गए, पंक्तियाँ संक्षिप्त करके आधुनिक शब्दों में रखी गईं, व्याख्या की पंक्तियाँ छोड़ दी गईं; हर पद जाँचा गया।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी · © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions, CC BY-SA 4.0; changed: footnotes, headings, the cross references printed in the verses, the speakers' labels in the Song of Songs and the letters over Psalm 119 left out.