प्रकृति
बाइबल में पक्षी
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी के 38 अंश, पंक्ति-दर-पंक्ति, Nave’s Topical Bible से।
- पाँचवें दिन जल-जन्तुओं के साथ पक्षी बनाए गएउत्प 1:20–23
पद
उत्प 1:20–23फिर परमेश्वर ने कहा, “जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश के अन्तर में उड़ें।” इसलिए परमेश्वर ने जाति-जाति के बड़े-बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिनसे जल बहुत ही भर गया और एक-एक जाति के उड़नेवाले पक्षियों की भी सृष्टि की; और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। परमेश्वर ने यह कहकर उनको आशीष दी, “फूलो-फलो, और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ें।” तथा साँझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पाँचवाँ दिन हो गया।
- जल-प्रलय के बाद पक्षी भी भोजन के लिये दिए गएउत्प 9:2–3
पद
उत्प 9:2–3तुम्हारा डर और भय पृथ्वी के सब पशुओं, और आकाश के सब पक्षियों, और भूमि पर के सब रेंगनेवाले जन्तुओं, और समुद्र की सब मछलियों पर बना रहेगा वे सब तुम्हारे वश में कर दिए जाते हैं। सब चलनेवाले जन्तु तुम्हारा आहार होंगे; जैसे तुम को हरे-हरे छोटे पेड़ दिए थे, वैसे ही तुम्हें सब कुछ देता हूँ।
- इस्राएल सब शुद्ध पक्षियों का माँस खा सकता थाव्यव 14:11
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व्यव 14:11“सब शुद्ध पक्षियों का माँस तो तुम खा सकते हो।
- वर्जित: उकाब, गिद्ध, काग, शुतुर्मुर्ग, उल्लू, सारस, बगुले, टिटीहरी, चमगादड़लैव्य 11:13–19
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लैव्य 11:13–19“फिर पक्षियों में से इनको अशुद्ध जानना, ये अशुद्ध होने के कारण खाए न जाएँ, अर्थात् उकाब, हड़फोड़, कुरर, चील, और भाँति-भाँति के बाज, और भाँति-भाँति के सब काग, शुतुर्मुर्ग, तखमास, जलकुक्कट, और भाँति-भाँति के शिकरे, हबासिल, हाड़गील, उल्लू, राजहँस, धनेश, गिद्ध, सारस, भाँति-भाँति के बगुले, टिटीहरी और चमगादड़।
- पक्षी सोतों के पास बसेरा करते और डालियों के बीच से बोलते हैंभज 104:12
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भज 104:12उनके पास आकाश के पक्षी बसेरा करते, और डालियों के बीच में से बोलते हैं।
- सारस का बसेरा सनोवर के वृक्षों में होता हैभज 104:17
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भज 104:17उनमें चिड़ियाँ अपने घोंसले बनाती हैं; सारस का बसेरा सनोवर के वृक्षों में होता है।
- वसन्त में पिण्डुक का शब्द सुनाई देता हैश्रेष्ठ 2:12
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श्रेष्ठ 2:12पृथ्वी पर फूल दिखाई देते हैं, चिड़ियों के गाने का समय आ पहुँचा है, और हमारे देश में पिण्डुक का शब्द सुनाई देता है।
- सारस, पंडुकी, सूपाबेनी और बगुला अपने आने का समय जानते हैंयिर्म 8:7
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यिर्म 8:7आकाश में सारस भी अपने नियत समयों को जानता है, और पंडुकी, सूपाबेनी, और बगुला भी अपने आने का समय रखते हैं; परन्तु मेरी प्रजा यहोवा का नियम नहीं जानती।
- शुतुर्मुर्गी अपने अण्डे भूमि पर छोड़कर धूलि में उन्हें गर्म करती हैअय्यू 39:14–15
पद
अय्यू 39:14–15क्योंकि वह तो अपने अण्डे भूमि पर छोड़ देती और धूलि में उन्हें गर्म करती है; और इसकी सुधि नहीं रखती, कि वे पाँव से कुचले जाएँगे, या कोई वन पशु उनको कुचल डालेगा।
- पंख फैलाकर वह घोड़े और उसके सवार को कुछ नहीं समझतीअय्यू 39:18
पद
अय्यू 39:18जिस समय वह सीधी होकर अपने पंख फैलाती है, तब घोड़े और उसके सवार दोनों को कुछ नहीं समझती है।
- बाज दक्षिण की ओर उड़ने को अपने पंख फैलाता हैअय्यू 39:26
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अय्यू 39:26“क्या तेरे समझाने से बाज उड़ता है, और दक्षिण की ओर उड़ने को अपने पंख फैलाता है?
- एक पैसे में दो गौरैये, या दो पैसे में पाँचमत्ती 10:29, लूका 12:6
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मत्ती 10:29क्या एक पैसे में दो गौरैये नहीं बिकती? फिर भी तुम्हारे पिता की इच्छा के बिना उनमें से एक भी भूमि पर नहीं गिर सकती।
लूका 12:6क्या दो पैसे की पाँच गौरैयाँ नहीं बिकती? फिर भी परमेश्वर उनमें से एक को भी नहीं भूलता।
- गौरैया और शूपाबेनी मन्दिर की वेदियों के पास घोंसला बनाती हैंभज 84:3
पद
भज 84:3हे सेनाओं के यहोवा, हे मेरे राजा, और मेरे परमेश्वर, तेरी वेदियों में गौरैया ने अपना बसेरा और शूपाबेनी ने घोंसला बना लिया है जिसमें वह अपने बच्चे रखे।
- पक्षी न बोते हैं, न काटते, न खत्तों में बटोरते हैंमत्ती 6:26
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मत्ती 6:26आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तो भी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उनको खिलाता है। क्या तुम उनसे अधिक मूल्य नहीं रखते?
- बढ़े हुए राई के पेड़ की डालियों पर पक्षी बसेरा करते हैंमत्ती 13:32
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मत्ती 13:32वह सब बीजों से छोटा तो है पर जब बढ़ जाता है तब सब साग-पात से बड़ा होता है; और ऐसा पेड़ हो जाता है, कि आकाश के पक्षी आकर उसकी डालियों पर बसेरा करते हैं।”
- “लोमड़ियों के भट और आकाश के पक्षियों के बसेरे होते हैं”मत्ती 8:20
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मत्ती 8:20यीशु ने उससे कहा, “लोमड़ियों के भट और आकाश के पक्षियों के बसेरे होते हैं; परन्तु मनुष्य के पुत्र के लिये सिर धरने की भी जगह नहीं है।”
- हर प्रकार के पक्षी मनुष्यजाति के वश में हो गए हैंयाकू 3:7
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याकू 3:7क्योंकि हर प्रकार के वन-पशु, पक्षी, और रेंगनेवाले जन्तु और जलचर तो मनुष्यजाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं।
- सुलैमान ने पशुओं, पक्षियों, रेंगनेवाले जन्तुओं और मछलियों की चर्चा की1 राजा 4:33
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1 राजा 4:33फिर उसने लबानोन के देवदारुओं से लेकर दीवार में से उगते हुए जूफा तक के सब पेड़ों की चर्चा और पशुओं पक्षियों और रेंगनेवाले जन्तुओं और मछलियों की चर्चा की।
कहानियों में
- नूह की कबूतरी जैतून का नया पत्ता लेकर लौटीउत्प 8:8–12
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उत्प 8:8–12फिर उसने अपने पास से एक कबूतरी को भी उड़ा दिया कि देखे कि जल भूमि से घट गया कि नहीं। उस कबूतरी को अपने पैर टेकने के लिये कोई आधार न मिला, तो वह उसके पास जहाज में लौट आई: क्योंकि सारी पृथ्वी के ऊपर जल ही जल छाया था तब उसने हाथ बढ़ाकर उसे अपने पास जहाज में ले लिया। तब और सात दिन तक ठहरकर, उसने उसी कबूतरी को जहाज में से फिर उड़ा दिया। और कबूतरी साँझ के समय उसके पास आ गई, तो क्या देखा कि उसकी चोंच में जैतून का एक नया पत्ता है; इससे नूह ने जान लिया, कि जल पृथ्वी पर घट गया है। फिर उसने सात दिन और ठहरकर उसी कबूतरी को उड़ा दिया; और वह उसके पास फिर कभी लौटकर न आई।
- माँसाहारी पक्षी अब्राम के टुकड़ों पर झपटे, और उसने उन्हें उड़ा दियाउत्प 15:10–11
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उत्प 15:10–11और इन सभी को लेकर, उसने बीच से दो टुकड़े कर दिया और टुकड़ों को आमने-सामने रखा पर चिड़ियों के उसने टुकड़े नहीं किए। जब माँसाहारी पक्षी लोथों पर झपटे, तब अब्राम ने उन्हें उड़ा दिया।
- साँझ को बटेरें आकर सारी छावनी पर बैठ गईंनिर्ग 16:13
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निर्ग 16:13तब ऐसा हुआ कि साँझ को बटेरें आकर सारी छावनी पर बैठ गईं; और भोर को छावनी के चारों ओर ओस पड़ी।
- समुद्र से उड़ाकर लाई गई बटेरें; किसी ने दस होमेर से कम न बटोरागिन 11:31–32
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गिन 11:31–32तब यहोवा की ओर से एक बड़ी आँधी आई, और वह समुद्र से बटेरें उड़ाकर छावनी पर और उसके चारों ओर इतनी ले आई, कि वे इधर-उधर एक दिन के मार्ग तक भूमि पर दो हाथ के लगभग ऊँचे तक छा गए। और लोगों ने उठकर उस दिन भर और रात भर, और दूसरे दिन भी दिन भर बटेरों को बटोरते रहे; जिसने कम से कम बटोरा उसने दस होमेर बटोरा; और उन्होंने उन्हें छावनी के चारों ओर फैला दिया।
- सुलैमान की मेज के लिये तैयार किए हुए पक्षी; नहेम्याह के लिये प्रतिदिन चिड़ियें1 राजा 4:23, नहे 5:18
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1 राजा 4:23दस तैयार किए हुए बैल और चराइयों में से बीस बैल और सौ भेड़-बकरी और इनको छोड़ हिरन, चिकारे, यखमूर और तैयार किए हुए पक्षी।
नहे 5:18जो प्रतिदिन के लिये तैयार किया जाता था वह एक बैल, छः अच्छी-अच्छी भेड़ें व बकरियाँ थीं, और मेरे लिये चिड़ियें भी तैयार की जाती थीं; दस-दस दिन के बाद भाँति-भाँति का बहुत दाखमधु भी तैयार किया जाता था; परन्तु तो भी मैंने अधिपति के हक़ का भोज नहीं लिया,
- पतरस के इन्कार करते ही मुर्गे ने बाँग दीमत्ती 26:74–75
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मत्ती 26:74–75तब वह कोसने और शपथ खाने लगा, “मैं उस मनुष्य को नहीं जानता।” और तुरन्त मुर्गे ने बाँग दी। तब पतरस को यीशु की कही हुई बात स्मरण आई, “मुर्गे के बाँग देने से पहले तू तीन बार मेरा इन्कार करेगा।” और वह बाहर जाकर फूट फूटकर रोने लगा।
व्यवस्था में
- घोंसले से बच्चे ले लो, पर माँ को छोड़ दोव्यव 22:6–7
पद
व्यव 22:6–7“यदि वृक्ष या भूमि पर तेरे सामने मार्ग में किसी चिड़िया का घोंसला मिले, चाहे उसमें बच्चे हों चाहे अण्डे, और उन बच्चों या अण्डों पर उनकी माँ बैठी हुई हो, तो बच्चों समेत माँ को न लेना; बच्चों को अपने लिये ले तो ले, परन्तु माँ को अवश्य छोड़ देना; इसलिए कि तेरा भला हो, और तेरी आयु के दिन बहुत हों।
- चर्मरोग से शुद्धि: दो पक्षी, एक खुले मैदान में छोड़ दिया जाता थालैव्य 14:4–7
पद
लैव्य 14:4–7तो याजक आज्ञा दे कि शुद्ध ठहरानेवाले के लिये दो शुद्ध और जीवित पक्षी, देवदार की लकड़ी, और लाल रंग का कपड़ा और जूफा ये सब लिये जाएँ; और याजक आज्ञा दे कि एक पक्षी बहते हुए जल के ऊपर मिट्टी के पात्र में बलि किया जाए। तब वह जीवित पक्षी को देवदार की लकड़ी और लाल रंग के कपड़े और जूफा इन सभी को लेकर एक संग उस पक्षी के लहू में जो बहते हुए जल के ऊपर बलि किया गया है डुबा दे; और कोढ़ से शुद्ध ठहरनेवाले पर सात बार छिड़ककर उसको शुद्ध ठहराए, तब उस जीवित पक्षी को मैदान में छोड़ दे।
- शिशु यीशु के लिये: पण्डुकों का एक जोड़ा या कबूतर के दो बच्चेलूका 2:22, लूका 2:24
फंदों के विषय में वचन
- “पक्षी के देखते हुए जाल फैलाना व्यर्थ होता है”नीति 1:17
पद
नीति 1:17क्योंकि पक्षी के देखते हुए जाल फैलाना व्यर्थ होता है;
- “क्या चिड़िया बिना फंदा लगाए फँसेगी?”आमो 3:5
पद
आमो 3:5क्या चिड़िया बिना फंदा लगाए फँसेगी? क्या बिना कुछ फँसे फंदा भूमि पर से उचकेगा?
- “हमारा जीव पक्षी के समान चिड़ीमार के जाल से छूट गया”भज 124:7
पद
भज 124:7हमारा जीव पक्षी के समान चिड़ीमार के जाल से छूट गया; जाल फट गया और हम बच निकले!
- फंदे में फँसी चिड़ियों के समानसभो 9:12
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सभो 9:12क्योंकि मनुष्य अपना समय नहीं जानता। जैसे मछलियाँ दुःखदाई जाल में और चिड़ियें फंदे में फँसती हैं, वैसे ही मनुष्य दुःखदाई समय में जो उन पर अचानक आ पड़ता है, फँस जाते हैं।
अन्य वचन
- “उस चिड़िया के समान है, जो घोंसला छोड़कर उड़ती फिरती है”नीति 27:8
पद
नीति 27:8स्थान छोड़कर घूमनेवाला मनुष्य उस चिड़िया के समान है, जो घोंसला छोड़कर उड़ती फिरती है।
- छल से भरे घर, “जैसा पिंजड़ा चिड़ियों से भरा हो”यिर्म 5:27
पद
यिर्म 5:27जैसा पिंजड़ा चिड़ियों से भरा हो, वैसे ही उनके घर छल से भरे रहते हैं; इसी प्रकार वे बढ़ गए और धनी हो गए हैं।
- “गौरे के समान … जो छत के ऊपर अकेला बैठता है”भज 102:7
पद
भज 102:7मैं पड़ा-पड़ा जागता रहता हूँ और गौरे के समान हो गया हूँ जो छत के ऊपर अकेला बैठता है।
- “मैं सूपाबेनी या सारस के समान च्यूं-च्यूं करता, मैं पिण्डुक के समान विलाप करता हूँ”यशा 38:14
पद
यशा 38:14मैं सूपाबेनी या सारस के समान च्यूं-च्यूं करता, मैं पिण्डुक के समान विलाप करता हूँ। मेरी आँखें ऊपर देखते-देखते पत्थरा गई हैं। हे यहोवा, मुझ पर अंधेर हो रहा है; तू मेरा सहारा हो!
स्रोत
Nave’s Topical Bible (Orville J. Nave, 1896; सार्वजनिक क्षेत्र) से: विषय चुने गए, पंक्तियाँ संक्षिप्त करके आधुनिक शब्दों में रखी गईं, व्याख्या की पंक्तियाँ छोड़ दी गईं; हर पद जाँचा गया।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी · © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions, CC BY-SA 4.0; changed: footnotes, headings, the cross references printed in the verses, the speakers' labels in the Song of Songs and the letters over Psalm 119 left out.