प्रकृति
बाइबल में सोसन और घास
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी के 35 अंश, पंक्ति-दर-पंक्ति, Nave’s Topical Bible से।
सोसन
- मन्दिर के ओसारे के खम्भों की कँगनियाँ सोसन के फूलों जैसी बनी थीं1 राजा 7:19, 1 राजा 7:22
पद
1 राजा 7:19जो कँगनियाँ ओसारों में खम्भों के सिरों पर बनीं, उनमें चार-चार हाथ ऊँचे सोसन के फूल बने हुए थे।
1 राजा 7:22और खम्भों के सिरों पर सोसन के फूल का काम बना था खम्भों का काम इसी रीति पूरा हुआ।
- पीतल के बड़े हौज का किनारा सोसन के फूल के समान था1 राजा 7:26, 2 इति 4:5
पद
1 राजा 7:26उसकी मोटाई मुट्ठी भर की थी, और उसका किनारा कटोरे के किनारे के समान सोसन के फूलों के जैसा बना था, और उसमें दो हजार बत पानी समाता था।
2 इति 4:5हौद के धातु की मोटाई मुट्ठी भर की थी, और उसका किनारा कटोरे के किनारे के समान, सोसन के फूलों के काम से बना था, और उसमें तीन हजार बत भरकर समाता था।
- “सोसनों के फूलों पर ध्यान करो, कि वे कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न काटते हैं”मत्ती 6:28, लूका 12:27
पद
मत्ती 6:28“और वस्त्र के लिये क्यों चिन्ता करते हो? सोसनों के फूलों पर ध्यान करो, कि वे कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न काटते हैं।
लूका 12:27सोसनों पर ध्यान करो, कि वे कैसे बढ़ते हैं; वे न परिश्रम करते, न काटते हैं; फिर भी मैं तुम से कहता हूँ, कि सुलैमान भी अपने सारे वैभव में, उनमें से किसी एक के समान वस्त्र पहने हुए न था।
- सुलैमान भी अपने सारे वैभव में उनमें से किसी के समान वस्त्र पहने हुए न थामत्ती 6:29
पद
मत्ती 6:29तो भी मैं तुम से कहता हूँ, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उनमें से किसी के समान वस्त्र पहने हुए न था।
- चरवाहा अपनी भेड़-बकरियाँ सोसन फूलों के बीच चराता हैश्रेष्ठ 2:16, श्रेष्ठ 6:3
पद
श्रेष्ठ 2:16मेरा प्रेमी मेरा है और मैं उसकी हूँ, वह अपनी भेड़-बकरियाँ सोसन फूलों के बीच में चराता है।
श्रेष्ठ 6:3मैं अपने प्रेमी की हूँ और मेरा प्रेमी मेरा है, वह अपनी भेड़-बकरियाँ सोसन फूलों के बीच चराता है।
- प्रेमी सोसन फूल बटोरने अपनी बारी में जाता हैश्रेष्ठ 6:2
पद
श्रेष्ठ 6:2मेरा प्रेमी अपनी बारी में अर्थात् बलसान की क्यारियों की ओर गया है, कि बारी में अपनी भेड़-बकरियाँ चराए और सोसन फूल बटोरे।
- “तराइयों का सोसन फूल … जैसे सोसन फूल कटीले पेड़ों के बीच”श्रेष्ठ 2:1–2
पद
श्रेष्ठ 2:1–2मैं शारोन का गुलाब और तराइयों का सोसन फूल हूँ। जैसे सोसन फूल कटीले पेड़ों के बीच वैसे ही मेरी प्रिय युवतियों के बीच में है।
- “उसके होंठ सोसन फूल हैं जिनसे पिघला हुआ गन्धरस टपकता है”श्रेष्ठ 5:13
पद
श्रेष्ठ 5:13उसके गाल फूलों की फुलवारी और बलसान की उभरी हुई क्यारियाँ हैं। उसके होंठ सोसन फूल हैं जिनसे पिघला हुआ गन्धरस टपकता है।
- सोसन फूलों के बीच चरते मृग के दो जुड़वे बच्चेश्रेष्ठ 4:5
पद
श्रेष्ठ 4:5तेरी दोनों छातियाँ मृग के दो जुड़वे बच्चों के तुल्य हैं, जो सोसन फूलों के बीच में चरते हों।
घास
- पशुओं के लिये और पहाड़ों पर घास उगती हैभज 104:14, भज 147:8, व्यव 11:15
पद
भज 104:14तू पशुओं के लिये घास, और मनुष्यों के काम के लिये अन्न आदि उपजाता है, और इस रीति भूमि से वह भोजन-वस्तुएँ उत्पन्न करता है
भज 147:8वह आकाश को मेघों से भर देता है, और पृथ्वी के लिये मेंह को तैयार करता है, और पहाड़ों पर घास उगाता है।
व्यव 11:15और मैं तेरे पशुओं के लिये तेरे मैदान में घास उपजाऊँगा, और तू पेट भर खाएगा और सन्तुष्ट रहेगा।
- घास की खूँटी पर बरसनेवाला मेंहभज 72:6
पद
भज 72:6वह घास की खूँटी पर बरसने वाले मेंह, और भूमि सींचने वाली झड़ियों के समान होगा।
- छत पर की घास बढ़ने से पहले सूख जाती हैभज 129:6–7, 2 राजा 19:26
पद
भज 129:6–7वे छत पर की घास के समान हों, जो बढ़ने से पहले सूख जाती है; जिससे कोई लवनेवाला अपनी मुट्ठी नहीं भरता, न पूलियों का कोई बाँधनेवाला अपनी अँकवार भर पाता है,
2 राजा 19:26इसी कारण उनके रहनेवालों का बल घट गया; वे विस्मित और लज्जित हुए; वे मैदान के छोटे-छोटे पेड़ों और हरी घास और छत पर की घास, और ऐसे अनाज के समान हो गए, जो बढ़ने से पहले सूख जाता है।
- मैदान की घास: आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगीमत्ती 6:30, लूका 12:28
पद
मत्ती 6:30इसलिए जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्त्र पहनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्यों न पहनाएगा?
लूका 12:28इसलिए यदि परमेश्वर मैदान की घास को जो आज है, और कल भट्ठी में झोंकी जाएगी, ऐसा पहनाता है; तो हे अल्पविश्वासियों, वह तुम्हें अधिक क्यों न पहनाएगा?
- कटी हुई घास उठा ली जाती है और नई घास दिखाई देती हैनीति 27:25
पद
नीति 27:25कटी हुई घास उठा ली जाती और नई घास दिखाई देती है और पहाड़ों की हरियाली काटकर इकट्ठी की जाती है;
- कड़ी धूप घास को सुखा देती है और उसका फूल झड़ जाता हैयाकू 1:11
पद
याकू 1:11क्योंकि सूर्य उदय होते ही कड़ी धूप पड़ती है और घास को सुखा देती है, और उसका फूल झड़ जाता है, और उसकी शोभा मिटती जाती है; उसी प्रकार धनवान भी अपने कार्यों के मध्य में ही लोप हो जाएँगे।
- सूखे में अहाब ने घोड़ों के लिये घास ढूँढ़ने सब सोतों और नदियों के पास भेजा1 राजा 18:5
पद
1 राजा 18:5और अहाब ने ओबद्याह से कहा, “देश में जल के सब सोतों और सब नदियों के पास जा, कदाचित् इतनी घास मिले कि हम घोड़ों और खच्चरों को जीवित बचा सके, और हमारे सब पशु न मर जाएँ।”
- निम्रीम का जल सूख गया और घास कुम्हला गईयशा 15:6
पद
यशा 15:6निम्रीम का जल सूख गया; घास कुम्हला गई और हरियाली मुर्झा गई, और नमी कुछ भी नहीं रही।
- जलगज बैल के समान घास खाता हैअय्यू 40:15
पद
अय्यू 40:15“उस जलगज को देख, जिसको मैंने तेरे साथ बनाया है, वह बैल के समान घास खाता है।
- नबूकदनेस्सर बैलों के समान घास चरने लगादानि 4:33
पद
दानि 4:33उसी घड़ी यह वचन नबूकदनेस्सर के विषय में पूरा हुआ। वह मनुष्यों में से निकाला गया, और बैलों के समान घास चरने लगा, और उसकी देह आकाश की ओस से भीगती थी, यहाँ तक कि उसके बाल उकाब पक्षियों के परों से और उसके नाखून चिड़ियाँ के पंजों के समान बढ़ गए।
- “जब जंगली गदहे को घास मिलती, तब क्या वह रेंकता है?”अय्यू 6:5
पद
अय्यू 6:5जब जंगली गदहे को घास मिलती, तब क्या वह रेंकता है? और बैल चारा पाकर क्या डकारता है?
- पाँच हजार लोग हरी घास पर बैठ गएयूह 6:10, मर 6:39
वचन
- “सब प्राणी घास हैं … घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है”यशा 40:6–8, 1 पत 1:24
पद
यशा 40:6–8बोलनेवाले का वचन सुनाई दिया, “प्रचार कर!” मैंने कहा, “मैं क्या प्रचार करूँ?” सब प्राणी घास हैं, उनकी शोभा मैदान के फूल के समान है। जब यहोवा की साँस उस पर चलती है, तब घास सूख जाती है, और फूल मुर्झा जाता है; निःसन्देह प्रजा घास है। घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है; परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा।
1 पत 1:24क्योंकि “हर एक प्राणी घास के समान है, और उसकी सारी शोभा घास के फूल के समान है: घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है।
- भोर को बढ़नेवाली घास साँझ तक मुर्झा जाती हैभज 90:5–6
पद
भज 90:5–6तू मनुष्यों को धारा में बहा देता है; वे स्वप्न से ठहरते हैं, वे भोर को बढ़नेवाली घास के समान होते हैं। वह भोर को फूलती और बढ़ती है, और साँझ तक कटकर मुर्झा जाती है।
- मनुष्य की आयु घास के समान है; पवन लगते ही वह नहीं रहताभज 103:15–16
पद
भज 103:15–16मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल के समान फूलता है, जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है।
- ओस के समान टपकती बातें, हरी घास पर झींसी के समानव्यव 32:2
पद
व्यव 32:2मेरा उपदेश मेंह के समान बरसेगा और मेरी बातें ओस के समान टपकेंगी, जैसे कि हरी घास पर झींसी, और पौधों पर झड़ियाँ।
स्रोत
Nave’s Topical Bible (Orville J. Nave, 1896; सार्वजनिक क्षेत्र) से: विषय चुने गए, पंक्तियाँ संक्षिप्त करके आधुनिक शब्दों में रखी गईं, व्याख्या की पंक्तियाँ छोड़ दी गईं; हर पद जाँचा गया।
इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी · © 2017, 2018, 2019 Bridge Connectivity Solutions, CC BY-SA 4.0; changed: footnotes, headings, the cross references printed in the verses, the speakers' labels in the Song of Songs and the letters over Psalm 119 left out.