नये राज्य के इस सबसे प्रसिद्ध फ़िरौन ने अबू सिम्बेल के मन्दिर और डेल्टा में एक नई राजधानी, पी-रामसेस, बनवाई। एक मत के अनुसार वही निर्गमन का फ़िरौन था; बाइबल फ़िरौन का नाम नहीं बताती।
बाइबल में · ईसा पूर्व 15वीं या 13वीं शताब्दी (तिथि विवादित) · रामसेस, नील डेल्टा में
निर्गमन
फसह की रात के बाद इस्राएली रामसेस से कूच करते हैं। विद्वान निर्गमन की तिथि या तो लगभग 1446 ईसा पूर्व या ईसा पूर्व 13वीं शताब्दी मानते हैं।
ऐसा हुआ कि आधी रात को यहोवा ने मिस्र देश में सिंहासन पर विराजनेवाले फ़िरौन से लेकर गड्ढे में पड़े हुए बँधुए तक सब के पहिलौठों को, वरन् पशुओं तक के सब पहिलौठों को मार डाला। और फ़िरौन रात ही को उठ बैठा, और उसके सब कर्मचारी, वरन् सारे मिस्री उठे; और मिस्र में बड़ा हाहाकार मचा, क्योंकि एक भी ऐसा घर न था जिसमें कोई मरा न हो। तब फ़िरौन ने रात ही रात में मूसा और हारून को बुलवाकर कहा, “तुम इस्राएलियों समेत मेरी प्रजा के बीच से निकल जाओ; और अपने कहने के अनुसार जाकर यहोवा की उपासना करो। अपने कहने के अनुसार अपनी भेड़-बकरियों और गाय-बैलों को साथ ले जाओ; और मुझे आशीर्वाद दे जाओ।” और मिस्री जो कहते थे, ‘हम तो सब मर मिटे हैं,’ उन्होंने इस्राएली लोगों पर दबाव डालकर कहा, “देश से झटपट निकल जाओ।” तब उन्होंने अपने गुँधे-गुँधाए आटे को बिना ख़मीर दिए ही कठौतियों समेत कपड़ों में बाँधकर अपने-अपने कंधे पर डाल लिया। इस्राएलियों ने मूसा के कहने के अनुसार मिस्रियों से सोने-चाँदी के गहने और वस्त्र माँग लिए। और यहोवा ने मिस्रियों को अपनी प्रजा के लोगों पर ऐसा दयालु किया कि उन्होंने जो-जो माँगा वह सब उनको दिया। इस प्रकार इस्राएलियों ने मिस्रियों को लूट लिया। तब इस्राएली रामसेस से कूच करके सुक्कोत को चले, और बाल-बच्चों को छोड़ वे कोई छः लाख पैदल चलनेवाले पुरुष थे। उनके साथ मिली-जुली हुई एक भीड़ गई, और भेड़-बकरी, गाय-बैल, बहुत से पशु भी साथ गए। और जो गूँधा आटा वे मिस्र से साथ ले गए उसकी उन्होंने बिना ख़मीर दिए रोटियाँ बनाईं; क्योंकि वे मिस्र से ऐसे बरबस निकाले गए, कि उन्हें अवसर भी न मिला की मार्ग में खाने के लिये कुछ पका सके, इसी कारण वह गूँधा हुआ आटा बिना ख़मीर का था। मिस्र में बसे हुए इस्राएलियों को चार सौ तीस वर्ष बीत गए थे। और उन चार सौ तीस वर्षों के बीतने पर, ठीक उसी दिन, यहोवा की सारी सेना मिस्र देश से निकल गई। यहोवा इस्राएलियों को मिस्र देश से निकाल लाया, इस कारण वह रात उसके निमित्त मानने के योग्य है; यह यहोवा की वही रात है जिसका पीढ़ी-पीढ़ी में मानना इस्राएलियों के लिये अवश्य है।उसी समय संसार में
मिस्र से निर्गमन कब हुआ, इस पर मतभेद है। एक मत के अनुसार यह 15वीं सदी ईसा पूर्व में हुआ, 1 राजाओं 6:1 से पीछे गिनने पर; दूसरे मत के अनुसार 13वीं सदी ईसा पूर्व में, जब रामसेस द्वितीय ने नील के डेल्टा में नगर बनवाए (निर्गमन 1:11 में रामसेस का नाम है)। कुछ इतिहासकार मानते हैं कि इसकी तिथि तय नहीं की जा सकती। यह रहा उन सदियों का संसार।
रामसेस द्वितीय के पुत्र फ़िरौन मेरनेप्टाह का एक विजय-स्तम्भ कनान में उसके द्वारा हराए गए लोगों में “इस्राएल” को गिनाता है — बाइबल के बाहर मिला इस्राएल का सबसे पुराना उल्लेख। यह अब काहिरा के मिस्री संग्रहालय में है।
यूनान में माइसीनी के योद्धा राजाओं ने अपने गढ़ का सिंह द्वार बनवाया। महलों और युद्धों के इस युग को बाद में होमर की ट्रॉय के युद्ध की कथाओं में याद किया गया।
शांग राजवंश की अन्तिम राजधानी आनयांग में राजा बैलों की हड्डियों और कछुए के खोलों को गर्मी से चटकाकर अपने पूर्वजों से प्रश्न पूछते थे और उन पर उत्तर लिखते थे। ये “दैवज्ञ अस्थियाँ” सबसे पुराना ज्ञात चीनी लेखन हैं।
उत्तर-पश्चिमी भारत में कवियों ने संस्कृत में ऋग्वेद की ऋचाएँ रचीं, जो हिन्दू धर्म के सबसे पुराने पवित्र ग्रन्थ हैं। लिखे जाने से पहले वे कई सदियों तक स्मृति के सहारे आगे बढ़ाई जाती रहीं।
मेक्सिको के खाड़ी तट पर सान लोरेन्ज़ो के ओल्मेक लोगों ने पत्थर के विशाल सिर तराशे, जिनमें से कुछ लगभग 3 मीटर ऊँचे हैं। वे मेसोअमेरिका की पहली महान सभ्यता थे।
नीपर से यूराल तक, काँस्य युग की लट्ठा-कब्र (स्रुबनाया) संस्कृति के पशुपालक — जिनका नाम लट्ठों से बनी उनकी कब्रों पर पड़ा — स्तेपी में गाय-बैल और भेड़ें पालते थे और नदियों के किनारे छोटे गाँवों में रहते थे।