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कला में बाइबल › उत्पत्ति

जलप्रलय; जैतून की डाली लेकर जहाज़ पर लौटती कबूतरी (Ms. 33, fol. 9, ‘वेल्टक्रोनिक’ से), अज्ञात चित्रकार, रेगेन्सबर्ग

कला में बाइबल · उत्पत्ति

जलप्रलय; जैतून की डाली लेकर जहाज़ पर लौटती कबूतरी (Ms. 33, fol. 9, ‘वेल्टक्रोनिक’ से)

अज्ञात चित्रकार, रेगेन्सबर्ग · about 1400–1410
जे. पॉल गेटी म्यूज़ियम, लॉस एंजेलिस

‘वेल्टक्रोनिक’ (‘विश्व-इतिहास’) तेरहवीं शताब्दी के लेखक रूडोल्फ़ फ़ॉन एम्स की एक लम्बी जर्मन कविता है, जो बाइबल को संसार के इतिहास के रूप में फिर से सुनाती है। यह प्रति रेगेन्सबर्ग में लगभग 1400–1410 में लिखी और चित्रित की गई।

चित्रकार ने टेम्परा रंगों के साथ सोना और चाँदी भी लगाई। जहाज़ एक गोल, छतवाली नाव है जिसमें मेहराबदार खिड़कियाँ हैं। नूह बाहर झुककर कबूतरी का स्वागत करता है, जो एक हरी डाली लेकर उड़ती आती है; उसके पास पशु बाहर झाँकते हैं और नीचे मछलियाँ तैरती हैं।

पाठ से

  • नूह कबूतरी को उड़ा देता है (उत्पत्ति 8:8)
  • “उसकी चोंच में जैतून का एक नया पत्ता है” (उत्पत्ति 8:11)

कलाकार का अपना

  • जहाज़ खपरैल की छतवाली, किले जैसी एक नाव के रूप में
  • पेंदे के ठीक नीचे तैरती मछलियाँ

विवरण

कबूतरी

एक सफ़ेद पक्षी हरी टहनी लेकर उड़ता आता है।

नूह

एक बूढ़ा पुरुष हाथ उठाए खिड़की से बाहर झुकता है।

पशु

दूसरी खिड़कियों से पशुओं के गहरे रंग के सिर बाहर झाँकते हैं।

जल के नीचे

बड़ी स्लेटी मछलियाँ पेंदे के नीचे तैरती हैं।

Unknown illuminator, Regensburg; text by Rudolf von Ems (Austrian, about 1200–1254). The J. Paul Getty Museum, Los Angeles (Ms. 33 (88.MP.70), fol. 9) · Tempera colors, gold, silver paint, and ink · Images provided here are believed to be in the public domain and are available under CC0 through Getty’s Open Content Program. (Getty record: "No Copyright", http://creativecommons.org/publicdomain/zero/1.0/)