34जब फरीसियों ने सुना कि यीशु ने सदूकियों का मुँह बन्द कर दिया; तो वे इकट्ठे हुए।
35और उनमें से एक व्यवस्थापक ने परखने के लिये, उससे पूछा,
36“हे गुरु, व्यवस्था में कौन सी आज्ञा बड़ी है?”
37उसने उससे कहा, “तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख।
38बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है।
39और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।
40ये ही दो आज्ञाएँ सारी व्यवस्था एवं भविष्यद्वक्ताओं का आधार हैं।”