प्रभामण्डल वाली एक किशोर आकृति, नंगे पाँव।
कला में बाइबल · लूका
उपदेशकों के बीच मसीह (Ms. 101, fol. 60, ‘सचित्र वीटा क्रिस्टी’ से, भक्ति-परिशिष्टों सहित)
अज्ञात अंग्रेज़ चित्रकार · about 1190–1200
जे. पॉल गेटी म्यूज़ियम, लॉस एंजेलिस
यह छोटा चित्र इंग्लैंड में, सम्भवतः यॉर्क में, लगभग 1190–1200 में बना, और तीन शताब्दियों बाद ईस्ट एंग्लिया में लिखी गई मसीह की एक चित्र-जीवनी में जिल्द में बाँधा गया। इसकी पृष्ठभूमि चमकाए गए सोने के पत्तर की है, जो एक चिपचिपी ज़मीन पर रखकर तब तक रगड़ा गया जब तक वह चमक न उठे।
प्रभामण्डल वाला किशोर यीशु बाईं ओर खड़ा है और दाढ़ीवाले पुरुषों के एक समूह के हाथ छूता है। ऊपर की पट्टी में लातीनी शब्द हैं: “quod est magnum mandatum in lege” — अर्थात् व्यवस्था में कौन सी आज्ञा बड़ी है।
पाठ से
- मन्दिर में उपदेशकों के बीच बैठा यीशु (लूका 2:46)
- “हे गुरु, व्यवस्था में कौन सी आज्ञा बड़ी है?” (मत्ती 22:36)
कलाकार का अपना
- मत्ती के शब्दों वाली पट्टी — संग्रहालय इस दृश्य को ‘उपदेशकों के बीच मसीह’ कहता है
- मन्दिर मीनारोंवाले शहरपनाह से घिरे नगर के रूप में
विवरण
लम्बे वस्त्रों में दाढ़ीवाले पुरुष आगे बढ़कर भीड़ लगाते हैं।
एक सफ़ेद पट्टी में लातीनी शब्द घुमाव लेते हैं।
मेहराब के ऊपर मीनारें और एक नीली छत।
Unknown illuminator, English (perhaps York). The J. Paul Getty Museum, Los Angeles (Ms. 101 (2008.3), fol. 60) · Tempera colors and gold leaf, on parchment · Images provided here are believed to be in the public domain and are available under CC0 through Getty’s Open Content Program. (Getty record: "No Copyright", http://creativecommons.org/publicdomain/zero/1.0/)
