यीशु हाथ उठाए बोलता है, उसके सिर से प्रकाश फूटता है; वह युवा चेला जिससे यीशु प्रेम रखता था, आँखें मूँदे उससे टिका है।
कला में बाइबल · यूहन्ना
अन्तिम भोज
आल्ब्रेख़्त ड्यूरर · 1510
क्लीवलैंड म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट
ड्यूरर ने यह अन्तिम भोज 1510 में काटा, जब वे अपने ‘बड़े दुःखभोग’ पर लौटे — बड़े काष्ठ-छापों की एक शृंखला, जो लगभग तेरह वर्ष पहले आरम्भ हुई थी। 1511 में उन्होंने ये बारह पन्ने न्यूरेमबर्ग में पुस्तक के रूप में प्रकाशित किए, जिनकी पीठ पर लातीनी पद्य छपे थे।
भोजन एक भारी गुम्बद के नीचे है, जिसे एक गोल खिड़की रोशन करती है। जब यीशु हाथ उठाकर बोलता है तो उसके सिर से प्रकाश की किरणें फैलती हैं, और प्रेरित मेज़ के चारों ओर भीड़ लगाए एक-दूसरे की ओर मुड़ते हैं।
पाठ से
- साँझ को बारह चेले यीशु के साथ भोजन करने बैठे (मत्ती 26:20)
- वह चेला जिससे यीशु प्रेम रखता था, उसकी छाती की ओर झुका हुआ (यूहन्ना 13:23–25)
- चेले संदेह करते हुए “एक दूसरे की ओर देखने लगे” (यूहन्ना 13:22)
कलाकार का अपना
- यरूशलेम की किसी अटारी की जगह गोल खिड़की वाला एक गुम्बददार जर्मन कमरा
- आगे ड्यूरर के समय की एक ऊँची सुराही, एक मर्तबान और एक स्टूल
- मेज़ के पाये पर कटी 1510 की तिथि
विवरण
भुने मेम्ने की हड्डियों और सिर वाली एक थाली, रोटियाँ और काँच का एक गिलास।
आगे एक प्रेरित ऊँची सुराही से कटोरे में उँडेलता है।
वर्ष मेज़ के पाये पर कटा है, मोनोग्राम नीचे फ़र्श पर।
Albrecht Dürer, German, 1471–1528. The Cleveland Museum of Art (Gift of The Print Club of Cleveland in memory of Ralph King, 1926.112) · Woodcut · Cleveland Museum of Art Open Access: Collection API record "share_license_status": "CC0" (Creative Commons Zero, https://creativecommons.org/publicdomain/zero/1.0/).
