समझदारों में पहली बाकियों को तेल मोल लेने जाने का संकेत करती है।
कला में बाइबल · मत्ती
समझदार और मूर्ख कुँवारियों का दृष्टान्त
विलियम ब्लेक · ca. 1799–1800
मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट, न्यूयॉर्क
विलियम ब्लेक ने यह जलरंग चित्र लगभग 1799–1800 में बनाया, जिन वर्षों में उन्होंने अपने संरक्षक थॉमस बट्स के लिए बाइबल-चित्रों की एक लम्बी शृंखला आरम्भ की। बाद में वे इस दृष्टान्त पर कई बार लौटे।
पाँच समझदार युवतियाँ ज़ंजीरों से लटकी मशालें लिए शांत, सीधी पंक्ति में खड़ी हैं, जबकि पाँच मूर्ख अँधेरे में घुटने टेककर विनती करती हैं। ऊपर एक आकृति रात के आकाश में तुरही फूँकती उड़ रही है। रंगों की परतें हल्के नीले स्पर्श के साथ कोमल सलेटी हैं।
पाठ से
- दस कुँवारियाँ जो अपनी मशालें लेकर निकलीं (मत्ती 25:1)
- “अपने तेल में से कुछ हमें भी दो, क्योंकि हमारी मशालें बुझ रही हैं” (मत्ती 25:8)
- “तुम बेचनेवालों के पास जाकर अपने लिये मोल ले लो” (मत्ती 25:9)
कलाकार का अपना
- आधी रात की पुकार आकाश में तुरही फूँकती एक आकृति के रूप में (मत्ती 25:6)
- समझदार एक सीधी पंक्ति में, मूर्ख भंगिमाओं की उलझन में
विवरण
समझदार छोटी लटकती मशालें लिए हैं, जो अब भी जल रही हैं।
नीले वस्त्र में एक मूर्ख कुँवारी घुटने टेककर अपनी बाँह फैलाती है।
एक पंखोंवाली आकृति लम्बी तुरही फूँकती हुई आकाश के आर-पार उड़ती है।
William Blake, British, 1757–1827. The Metropolitan Museum of Art, New York (Rogers Fund, 1914; acc. 14.81.2) · Watercolor, pen and black ink, brush and wash, over graphite · Public Domain — The Met Open Access (CC0). The Met Collection API record: "isPublicDomain": true; The Met marks such works on its website "with the Creative Commons Zero (CC0) icon".
