वह पुआल पर बैठा है, टाँगें कपड़ों में लिपटी, हथेली खुली।
कला में बाइबल · प्रेरितों के काम
मन्दिर के द्वार पर संत पतरस और संत यूहन्ना
आल्ब्रेख़्त ड्यूरर · 1513
मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट, न्यूयॉर्क
यह ड्यूरर के ‘उत्कीर्ण दुःखभोग’ की अन्तिम प्लेट है, 1513 की तिथि वाली — शृंखला का एकमात्र दृश्य जो प्रेरितों के काम से लिया गया है।
लँगड़ा मन्दिर के द्वार पर पुआल पर बैठा है, उसकी टाँगें कपड़ों में लिपटी हैं और पास एक कटोरा है। गंजा और दाढ़ीवाला पतरस उसकी ओर हाथ बढ़ाता है; युवा यूहन्ना पीछे खड़ा है, और देखनेवाले खम्भों के पास कानाफूसी करते हैं।
पाठ से
- पतरस और यूहन्ना मन्दिर में जा रहे थे (प्रेरितों के काम 3:1)
- मन्दिर के द्वार पर भीख माँगता एक जन्म का लँगड़ा (प्रेरितों के काम 3:2–3)
- पतरस उससे बात करता और उसका हाथ पकड़ता है (प्रेरितों के काम 3:6–7)
कलाकार का अपना
- भारी खम्भों वाले धुँधले कक्ष के रूप में मन्दिर का द्वार
- ड्यूरर के समय की ऊँची टोपियों और पगड़ियों में देखनेवाले
- कोने में 1513 की तिथि
विवरण
फ़र्श पर उसका भीख का कटोरा।
पतरस उसकी ओर अपना हाथ बढ़ाता है।
लम्बे घुँघराले बालों वाला युवा यूहन्ना पतरस के पीछे खड़ा है।
Albrecht Dürer, German, 1471–1528. The Metropolitan Museum of Art, New York (Fletcher Fund, 1919; acc. 19.73.18) · Engraving · Public Domain — The Met Open Access (CC0). The Met Collection API record: "isPublicDomain": true; The Met marks such works on its website "with the Creative Commons Zero (CC0) icon".
